• Wed. Jul 22nd, 2026

दिल्ली: बिना वैध PUC ईंधन नहीं, जुर्माना भी बड़ा

ByAnkshree

Jul 1, 2026

दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्थायी मास्टर प्लान 1 जुलाई को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत अब बिना वैध पीयूसी के किसी वाहन को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, भारी जुर्माना भी लगेगा। बाहरी बीएस-6 से नीचे के वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी, पार्किंग शुल्क दोगुना होगा और दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही बुलाने की व्यवस्था लागू की जाएगी। यह पूरी व्यवस्था हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी।दिल्ली सरकार ने पर्यावरण एवं वन विभाग के माध्यम से अधिसूचित दिशा-निर्देशों में वाहनों, निर्माण गतिविधियों, धूल प्रदूषण और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए स्थायी नियम तय किए हैं। सरकार का कहना है कि अब हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं होगी और सभी विभाग पहले से तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

पीयूसी नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सबसे बड़ा बदलाव वाहनों को लेकर किया गया है। अब पूरे साल दिल्ली के पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाणपत्र होगा। पीयूसी की जांच केवल प्रमाणपत्र दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वाहन डेटाबेस और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी इसकी पुष्टि की जाएगी। तेल कंपनियों, परिवहन विभाग, दिल्ली नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को इस व्यवस्था को लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

बाहर से आने वाले प्रदूषणकारी वाहनों पर रोक
सर्दियों में प्रदूषण बढ़ाने वाले बाहरी वाहनों पर भी सख्ती की गई है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से नीचे के मोटर वाहनों के प्रवेश और संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस वाहन और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। 

दफ्तरों में आधे कर्मचारी, घर से काम को बढ़ावा
प्रदूषण के दौरान सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए दिल्ली सरकार और निजी कार्यालयों में भी बदलाव किया गया है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक एक समय में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आएंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकारी विभागों में आवश्यक सेवाओं और वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आने की अनुमति रहेगी। निजी संस्थानों को भी अलग-अलग शिफ्ट, कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )