राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से दिया आजाद होने का ऐलान, बोले- दो तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में विलय करेंगे
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आया है जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए इसके मौजूदा नेतृत्व और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी मूल आदर्शों से विचलित हो चुकी है और उनके साथ दो तिहाई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय करने का निर्णय ले चुके हैं।
राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि वे ‘‘गलत पार्टी में सही आदमी’’ थे और इस स्थिति को लंबे समय तक वह स्वीकार नहीं कर सके। साथ ही उन्होंने पार्टी के वर्तमान स्वरूप और कार्यशैली को उसकी मूल विचारधारा से अलग बताया।
बीजेपी में विलय का ऐलान
चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दस सांसदों में से दो तिहाई सांसद उनके समर्थन में हैं और संविधान के नियमों के तहत इन सांसदों ने बीजेपी में विलय करने का formal निर्णय लिया है। उन्होंने संदीप पाठक, अशोक मित्तल सहित अन्य सांसदों के साथ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर भी किए जाने की बात कही। यह बयान राजनीतिक गलियारों में बड़े असर वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो AAP की संसदीय ताकत को क्षति पहुंचा सकता है।
पार्टी पर गंभीर आरोप
चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने 15 वर्षों तक समर्पित किया वह अब निजी हितों और स्वार्थों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर ‘‘घुटन और असहमति’’ का माहौल है और इसकी नीतियां अब देशहित के बजाय व्यक्तिगत फायदे पर केंद्रित हो गई हैं। उन्होंने कहा, “मैं अब आम आदमी पार्टी से दूर जाकर जनता के करीब जाना चाहता हूं।”
सांसदों के समर्थन का दावा
राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में पार्टी के दस सांसद हैं, जिनमें से सात उनके समर्थन में हैं। उन्होंने इन सांसदों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं: संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक कुमार मित्तल। उन्होंने पूरे प्रक्रिया को विधिक रूप से लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई भी की है।
संदीप पाठक का बयान
संदीप पाठक ने कहा, “मैंने अपने दस साल आम आदमी पार्टी के लिए दिए हैं, लेकिन यह स्थिति आ जाना कभी सोचा भी नहीं था। हम सभी ने अपना रास्ता अलग चुना है, लेकिन हमारा एकमात्र उद्देश्य देश के लिए काम करना है।” उन्होंने अपनी IIT प्रवृत्ति और देशभक्ति के लिए समर्पण को भी साझा किया।
पार्टी से मतभेद की शुरुआत
चड्ढा और AAP नेतृत्व के मध्य मतभेद उस वक्त बढ़े जब 2 अप्रैल को पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया। पार्टी ने उन्हें संसद में बोलने का समय भी न देने का अनुरोध किया। इस स्थिति पर चड्ढा ने 3 अप्रैल को प्रसारित किए गए वीडियो संदेश में अपनी नाराजगी जताई और कहा कि वे जनता के लिए संसद में आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन अब उन्हें खामोशी अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
AAP नेताओं का पलटवार
AAP के वरिष्ठ नेताओं ने चड्ढा पर पलटवार किया है। अनुराग ढांडा, सौरभ भारद्वाज, आतिशी मार्लेना और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर कार्यरत थे और जब पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, वे विदेश में थे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में आक्रामक कदम भी नहीं उठाया।
राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया
राघव चड्ढा के इस कदम ने राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। AAP के अंदर यह संकट बड़े विभाजन का संकेत माना जा रहा है, जबकि बीजेपी के लिए इसे रणनीतिक लाभ के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि इस निर्णय का देश की राजनीति पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।