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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित территорияों से मांगा राइट टू एजुकेशन पालन पर जवाब

ByAnkshree

Apr 13, 2026 #India
Supreme Court seeks responses of Centre, States and Union Territories on PIL for implementation of Right to Education
नई दिल्ली, भारत

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) की प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार, विभिन्न राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से इस संबंध में जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि इस मामले में नोटिस जारी किए जा रहे हैं और मुद्दे की गंभीरता से जांच की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका के तहत केंद्र और राज्यों की विभिन्न एजेंसियों से कहा गया है कि वे आरटीई कानून के अंतर्गत सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करें और इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं। उच्चतम न्यायालय का यह कदम शिक्षा के अधिकार को पूर्ण रूप से लागू करने में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

चीफ जस्टिस ने चलते वक्त कहा, “हम नोटिस जारी कर रहे हैं। हम इस मुद्दे की गहराई से जांच करना चाहते हैं।” आरटीई अधिनियम, जो कि 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है, की सही और प्रभावी पालना के लिए यह प्रतिक्रिया आवश्यक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि आरटीई कानून लागू किया जा चुका है, लेकिन इसकी सफलता सरकारों की कार्यवाही पर निर्भर करती है। स्कूलों में उचित संसाधन, शिक्षकों की संख्या और गुणवत्ता, तथा समावेशी शिक्षा की दिशा में उत्साहजनक प्रगति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को शिक्षा के अधिकार के संरक्षण के लिए बेहद सकारात्मक माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्रालय समेत अन्य संस्थान इस मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे जिसके आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई करेगा। इस न्यायिक पहल से उम्मीद की जा रही है कि भारत में शिक्षा का अधिकार और भी अधिक सशक्त और सभी के लिए सुलभ बनेगा।

इसके अलावा, इस प्रक्रिया में सरकारों की जवाबदेही भी बढ़ेगी जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंचने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने इस कदम को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में रणनीतिक विकास बताया है।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई जल्द ही निर्धारित की जाएगी। तब तक सरकारों से विस्तृत और सटीक जानकारी मिलने की आशा जताई जा रही है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )