भारत और उज्बेकिस्तान ने नई दिल्ली में 17वीं विदेश कार्यालय परामर्श बैठक की
नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बुधवार को नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श की 17वीं बैठक संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।
इस बैठक में व्यापार, निवेश, पर्यटन, टेक्नोलॉजी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे प्रमुख विषयों पर केंद्रित वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया, जिससे दोतरफा सहयोग को नई दिशा मिली।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) शिबी जॉर्ज और उज्बेकिस्तान के विदेश मामलों के प्रथम उप मंत्री बखरोमजोन अलोयेव ने की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की विस्तृत समीक्षा की और कांसुलर मामलों समेत सभी पहलुओं पर बात की।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक और गहरे रिश्ते हैं। भारत उन पहले देशों में था जिन्होंने उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद उसकी संप्रभुता को मान्यता दी थी। 1992 में ताशकंद में कूटनीतिक संबंध स्थापित करने का प्रोटोकॉल साइन हुआ, और 2011 में दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया।
उज्बेकिस्तान के प्रथम उप विदेश मंत्री बखरोमजोन अलोयेव ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक में भाग लेने के लिए पहले ही नई दिल्ली पहुंचकर इस वार्ता का भी हिस्सा बने। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा और इस साल की थीम ‘‘बिल्डिंग फॉर रेसिलियेंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी’’ है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 के 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रियो डी जेनेरियो में प्रस्तुत की गई थी। यह थीम मानव केंद्रित विकास और सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।