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ग्रेटर नोएडा: योजना के तहत 30 जून तक जल शुल्क का बकाया जमा करने पर ब्याज में 40 प्रतिशत की छूट

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जल शुल्क के बकाएदारों को बड़ी राहत देते हुए लागू की गई एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत ब्याज पर 40 प्रतिशत की छूट प्राप्त करने का अंतिम अवसर 30 जून है। कल के बाद घटती जाएगी छूटमंगलवार तक बकाया जल शुल्क जमा करने वाले उपभोक्ताओं को ब्याज की राशि पर 40 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा। इसके बाद यह छूट क्रमशः कम होती जाएगी।

प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुनील कुमार सिंह ने बताया कि प्राधिकरण बोर्ड की स्वीकृति के बाद तीन माह के लिए विशेष ओटीएस योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत 30 जून तक जल शुल्क का बकाया जमा करने पर ब्याज में 40 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, 1 जुलाई से 31 जुलाई तक भुगतान करने वालों को ब्याज पर 30 प्रतिशत और 1 अगस्त से 31 अगस्त तक भुगतान करने वालों को 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। 31 अगस्त के बाद यह योजना स्वतः समाप्त हो जाएगी और किसी प्रकार की छूट का लाभ नहीं मिलेगा

किसके ऊपर कितना बकायाप्राधिकरण के मुताबिक, वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के आवंटियों पर करीब 290 करोड़ रुपये का जल शुल्क बकाया है। इनमें सबसे अधिक लगभग 146 करोड़ रुपये बिल्डर सोसाइटियों पर बकाया हैं। इसके अलावा आवासीय आवंटियों पर करीब 65 करोड़ रुपये, संस्थागत आवंटियों पर 50 करोड़ रुपये, औद्योगिक इकाइयों पर 14.61 करोड़ रुपए, आवासीय समितियों पर लगभग 10 करोड़ रुपए तथा शेष राशि आईटी और व्यावसायिक श्रेणी के आवंटियों पर बकाया है।बकाएदारों की बड़ी राहतप्राधिकरण का मानना है कि इस योजना से बड़ी संख्या में बकाएदारों को राहत मिलेगी और जल शुल्क की वसूली में भी तेजी आएगी। अधिकारियों ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 30 जून तक अपने बकाया बिल का भुगतान कर ब्याज पर 40 प्रतिशत की अधिकतम छूट का लाभ उठाएं।

इस साल जल मूल्य पर नहीं हुई बढ़ोतरीउल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार की पहल पर इस वर्ष जल मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई है। जबकि पिछले कई वर्षों से हर साल जल शुल्क में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती रही है। ऐसे में जल शुल्क नहीं बढ़ाने के साथ-साथ ओटीएस योजना के माध्यम से ब्याज में छूट देकर प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को दोहरी राहत प्रदान की है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )