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मौनी अमावस्या पर 3.61 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया, भीड़ नियंत्रण के लिए स्पेशल ट्रेन रोकी गई

Report By : ICN Network
महाकुंभ में मंगलवार की रात भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि भगदड़ मच गई। इसमें 17 लोगों की मौत हो गई, हालांकि मरने वालों की संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। महाकुंभ के अस्पताल में घायलों को लेकर आने वाली एंबुलेंस का तांता लगा हुआ है

संगम नगरी में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा हुआ जब महाकुंभ में बढ़ती भीड़ के दबाव से भगदड़ मच गई। इस दुर्घटना में 17 लोगों की मौत की सूचना है, हालांकि मृतकों की संख्या कहीं अधिक होने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके अलावा, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। महाकुंभ के अस्पतालों में घायलों को लाने वाली एंबुलेंस की लगातार आवाजें सुनाई दे रही थीं और प्रशासन राहत व बचाव कार्यों में जुटा था। यह दर्दनाक हादसा मंगलवार रात करीब दो बजे संगम तट के पास हुआ

महाकुंभ के मौनी अमावस्या स्नान के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में प्रयागराज पहुंचे थे। जैसे ही भीड़ स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंची, वहां भारी दबाव बन गया और भगदड़ मच गई। इस घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत स्थिति को संभालने के लिए विभिन्न कदम उठाए। बुधवार की सुबह, जब प्रयागराज में भीड़ पूरी तरह से बेकाबू हो गई, तो रेल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुंभ स्पेशल ट्रेन को रोकने का फैसला किया। स्पेशल ट्रेन को प्रयागराज के विभिन्न स्टेशनों पर रोक दिया गया, जिससे यात्रियों की आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण रखा गया

बुधवार सुबह सात बजे डीडीयू स्टेशन से एक कुंभ स्पेशल ट्रेन प्रयागराज के लिए रवाना की गई थी, लेकिन इसे मेजारोड में रोक दिया गया। रेल प्रशासन ने बताया कि इस समय प्रयागराज किसी भी स्पेशल ट्रेन को रिसीव नहीं कर रहा था। डीडीयू स्टेशन पर बैरिकेडिंग लगाकर यात्रियों को रोका गया और केवल आवश्यक यात्रियों को स्टेशन में जाने की अनुमति दी गई

इस संबंध में जीआरपी प्रभारी निरीक्षक और आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होते ही कुंभ स्पेशल ट्रेन को फिर से चलाया जाएगा। प्रशासन ने स्थिति को काबू में करने के लिए पूरा ध्यान दिया और राहत कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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