Report By : ICN Network
केरल के एर्नाकुलम जिले के मुनंबम गांव में रहने वाले लगभग 600 परिवारों को अपनी जमीन और घरों से बेदखल किए जाने का खतरा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2019 में वक्फ बोर्ड ने इस इलाके की जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित किया और राजस्व विभाग को निवासियों से भूमि कर न लेने का निर्देश दिया।
मुनंबम एक तटीय गांव है जहां अधिकांश निवासी ईसाई समुदाय से आते हैं। वे कई पीढ़ियों से इस भूमि पर रह रहे हैं। यह भूमि पहले त्रावणकोर राजघराने के पास थी, जिसे 1902 में एक व्यापारी को पट्टे पर दिया गया था। बाद में इस भूमि को एक शैक्षणिक संस्थान को दान कर दिया गया और तब से यह वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है।
1987 से 1993 के बीच, निवासियों ने कॉलेज प्रबंधन से जमीन की कीमत चुका कर टाइटल डीड भी प्राप्त किए थे। लेकिन 1995 में वक्फ अधिनियम लागू होने के बाद यह मामला पेचीदा हो गया। एक सरकारी जांच में यह भूमि वक्फ संपत्ति मानी गई और आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई।
राजनीतिक स्तर पर यह मामला गरमा गया है। भाजपा ने वक्फ बोर्ड की शक्तियों पर सवाल उठाते हुए इसे भूमि पर एकतरफा दावा बताया है। पार्टी नेताओं ने इसे “भूमि जिहाद” का नाम देते हुए आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड उन संपत्तियों पर दावा कर रहा है जहां लोग वर्षों से रहते आ रहे हैं।
केरल की ईसाई संस्थाओं ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है और संसद समिति को याचिका सौंप कर न्याय की मांग की है। मामला फिलहाल केरल हाईकोर्ट में विचाराधीन है और स्थानीय निवासी बेहद चिंतित हैं कि कहीं उन्हें अपने ही घरों से निकाला न जाए।