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नोएडा: अंतरराज्यीय गैंग से 821 मोबाइल बरामद, बिहार, झारखंड से नेपाल तक सप्लाई

नोएडा व एनसीआर के शहरों से मोबाइल चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गैंग का नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली फेज टू पुलिस ने एक साथ 821 मोबाइल बरामद किए हैं। चोरी के मोबाइल को ये बदमाश बिहार, झारखंड से लेकर नेपाल तक बेचते थे। पुलिस ने इस गिरोह के छह बदमाशों को ककराला क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही दो किशोरों को संरक्षण में लिया है। बदमाशों की पहचान बिहार निवासी गोविंदा महतो, मवाना मेरठ निवासी रोहित सैनी, झारखंड निवासी श्याम कुमार राय, भरतीया महतो, शेखर और प्रदीप कुमार के रूप में हुई है।

नोएडा सेंट्रल जोन के डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि कोतवाली फेज टू पुलिस की टीम ने भीड़ भाड़ वाले बाजारों, फल व सब्जी मंडियों व साप्ताहिक बाजार में मोबाइल चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गैंग का खुलासा किया है। आरोपियों की निशानदेही पर एनसीआर के विभिन्न साप्ताहिक बाजारों से चोरी किए गए 821 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। डीसीपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी साप्ताहिक बाजारों में खरीदारी करने वाले लोगों की जेब से मोबाइल फोन और अन्य सामान चोरी करते हैं। इन लोगों ने मोबाइल फोन की एक हजार से ज्यादा चोरी की वारदातें करनी स्वीकार की हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इनके गैंग में और कितने लोग शामिल हैं।

लिटिल गैंग को लगाते हैं महिलाओं के पीछे : पुलिस की जांच में पता चला कि इस गिरोह में व्यस्क व लिटिल चोर शामिल रहते हैं। नाबालिगों को भीड़भाड़ वाले इलाके में महिलाओं के पीछे लगाते हैं। ताकि नाबालिग आसानी से महिलाओं के पर्स से मोबाइल चुरा सके और उस पर शक भी न हो। इस गिरोह के सदस्य अलग -अलग काम करते हैं और मोबाइल चोरी कर वापस अपने राज्य चले जाते हैं। वहां ये लोग मोबाइल कम कीमत में बेच देते हैं।

झारखंड-बंगाल टू नोएडा : गिरफ्तार किए गए बदमाश बिहार, बंगाल व झारखंड से ट्रेन से दिल्ली आते हैं और यहां से नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा के गांवों में रहते हैं। गांव में जाकर ये लोग कमरा ढूंढते हैं। कमरा ढूंढने के दौरान बताते हैं कि उनके माता पिता एक दो दिन में आ रहे हैं। इसके बाद वह कोई पहचान पत्र भी नहीं देते थे। एक दो दिन वहां रहते थे और कई चोरी करने के बाद वह कमरा छोड़कर भाग जाते थे।

छह से आठ आठ करोड़ के हैं मोबाइल : पुलिस का कहना है कि बदमाशों के पास से बरामद 821 मोबाइल की कीमत करीब छह से आठ करोड़ रुपये तक है। शुरुआत में इस गिरोह का कोई निश्चित ग्राहक नहीं होते थे और ये लोग तोल मोल कर कम कीमत में बेच देते थे। लेकिन अब इस गैंग के निश्चित सदस्य भी बन गए हैं। ये लोग एक साथ निकलते हें और चोरी के दौरान स्थान बदलते रहते हैं। चोरी करने के बाद एक दूसरे को चोरी का मोबाइल थमा देते हैं। ताकि अगर कोई पकड़ ले या पहचान ले तब उसके पास मोबाइल न मिले।



इस तरह से करते थे चोरी

– गिरफ्तार आरोपी व संरक्षण में लिए गए नाबालिग नियमित रूप से लगने वाली मंडी व साप्ताहिक बाजार में आने वाले ग्राहकों को टारगेट करते थे।

– सभी आरोपी ग्राहकों का ध्यान भंग होने की प्रतीक्षा करते थे व थोड़ी सी भी चूक होने पर तुरंत मोबाइल फोन चोरी करके गायब हो जाते थे।

– आरोपी समूह में कार्य करते थे तथा मोबाइल चुरा लेने के बाद दूसरे साथी को थमा देते थे।

– मोबाइल चोरी करने के बाद ट्रेन के माध्यम से चोरी के मोबाइल फोन बेचने के लिए झारखंड या बिहार वापस चले जाते थे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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