केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग को लेकर बनाए गए नियमों को अगले 15 दिनों के भीतर अधिसूचित कर सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 22 जनवरी को दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान मनीकंट्रोल से बातचीत में यह जानकारी दी।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत किसी कानून के मूल प्रावधान संसद से पारित होते ही लागू हो जाते हैं, जबकि उसके क्रियान्वयन के लिए नियम बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नियम तैयार हो चुके हैं और अधिकतम 15 दिनों के भीतर उन्हें प्रकाशित कर दिया जाएगा।
मंत्री, जो सूचना एवं प्रसारण और रेल मंत्रालय का भी प्रभार संभाल रहे हैं, ने बताया कि यह ढांचा विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि गेमिंग उद्योग, वित्तीय क्षेत्र, नियामक संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की गई थी।
भारत ने अगस्त 2025 में ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ लागू किया था। इस कानून के तहत उन ऑनलाइन मनी गेम्स पर रोक लगाई गई है, जिनमें खिलाड़ी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पैसा जमा करते हैं और उसी जमा राशि से जीत की उम्मीद रखते हैं।
कानून सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के व्यापक अधिकार देता है और प्रतिबंधित गेम्स को संचालित या बढ़ावा देने वाले ऑपरेटर, विज्ञापनदाता और वित्तीय मध्यस्थों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है।
यह अधिनियम कैबिनेट की मंजूरी से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक केवल चार दिनों में पारित हुआ, जो हाल के संसदीय इतिहास में सबसे तेज विधायी प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है।
कानून लागू होने के बाद भारत के रियल-मनी गेमिंग उद्योग, जिसकी अनुमानित वैल्यू 3.5 अरब डॉलर थी, में भारी गिरावट दर्ज की गई और देश के गेमिंग इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आया।
अक्टूबर में सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए मसौदा नियम जारी किए थे और आम जनता से सुझाव मांगे थे। मसौदे में ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ के गठन, गेम रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, शिकायत निवारण तंत्र और नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान शामिल है।