मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की बहुप्रतीक्षित 21 किलोमीटर लंबी वॉटर टनल परियोजना को कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) की हरी झंडी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से मुंबई की जल आपूर्ति प्रणाली और मजबूत होगी तथा भविष्य में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। बीएमसी इसे बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर विकसित कर रही है।
यह सुरंग ठाणे के येवई और काशेली क्षेत्र को मुंबई के पूर्वी उपनगर मुलुंड से जोड़ेगी। परियोजना पर करीब 4,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसमें 14 किलोमीटर लंबी येवई-काशेली सुरंग और 7 किलोमीटर लंबी काशेली-मुलुंड सुरंग शामिल है। सुरंग की गहराई करीब 110 मीटर होगी और इसे अगले छह वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मार्च 2024 में बीएमसी ने दोनों सुरंगों के लिए टेंडर जारी किए थे, लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति लंबित थी। अब पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने काशेली (भिवंडी) से मुलुंड (ऑक्ट्रॉय नाका) तक प्रस्तावित वॉटरवे प्रोजेक्ट को CRZ क्लीयरेंस दे दी है। टनल का निर्माण टनल बोरिंग मशीन (TBM) से किया जाएगा। इसका व्यास 5.3 मीटर होगा और यह 150 से 180 मीटर की गहराई पर बनेगी। यह नई सुरंग पुरानी पाइपलाइनों की जगह लेगी, जिससे पूर्वी उपनगरों में जल आपूर्ति और सुचारु होगी।
बीएमसी अन्य बड़े जल सुरंग प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। मारोल-माहिम, मालाबार हिल-क्रॉस मैदान, वेरावली-यारी रोड और गुंडावली-भांडुप कॉम्प्लेक्स के बीच संभावित लिंक पर विचार चल रहा है। इसके अलावा, पवई, वेरावली और घाटकोपर को जोड़ने वाली छोटी सुरंगें भी प्रस्तावित हैं, जिससे शहर का वितरण नेटवर्क और मजबूत होगा।
फिलहाल मुंबई को ठाणे और नासिक की झीलों से पानी की आपूर्ति होती है, और यह नई सुरंग व्यवस्था को भविष्य के लिए और सुरक्षित बनाएगी।