मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग को एक संदेश मिला कि ₹500 का ट्रैफिक चालान बकाया है। यह संदेश उनकी पत्नी के फोन पर एक अनजान नंबर से आया और उसमें भुगतान का लिंक था। संदेश को सही मानकर उन्होंने लिंक खोला और क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने की कोशिश की। शुरुआती भुगतान सफल दिखा, लेकिन कुछ ही देर में ₹2,49,246.61 (जिसमें विदेशी मुद्रा सऊदी रियाल में लेनदेन भी शामिल था) कट गए। बाद में साइबर पुलिस ने पुष्टि की कि रकम अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन रूट से निकाली गई। पुलिस ने धोखाधड़ी और पहचान के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है। फर्जी चालान स्कैम कैसे काम करता है?
यह स्कैम बेहद योजनाबद्ध होता है और असली जैसा दिखाया जाता है। आमतौर पर इसमें शामिल होता है:
- बकाया ट्रैफिक चालान का दावा
- सरकारी भाषा और लोगो का इस्तेमाल
- “तुरंत भुगतान” के लिए लिंक या QR
- परिवहन पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट
- कार्ड/बैंक डिटेल्स की मांग
- तुरंत अनधिकृत निकासी
अगर आपको ऐसा संदेश मिले तो सतर्क हो जाएं:
- अनजान या संदिग्ध लिंक
- OTP, CVV या कार्ड डिटेल्स की मांग
- लाइसेंस सस्पेंशन/कानूनी कार्रवाई की धमकी
- चालान/वाहन की पूरी जानकारी न होना
- थर्ड-पार्टी ऐप से भुगतान का दबाव
- URL का .gov.in से खत्म न होना
ठगी से बचने के लिए:
- चालान सिर्फ आधिकारिक पोर्टल पर जांचें
- वाहन नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर से सर्च करें
- SMS/WhatsApp के रैंडम लिंक पर क्लिक न करें
- अनजान वेबसाइट से भुगतान न करें
- किसी से भी बैंकिंग डिटेल्स साझा न करें
देरी न करें, पहले 60 मिनट (गोल्डन ऑवर) बेहद अहम होते हैं:
- 1930 पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
- अपने बैंक/कार्ड जारीकर्ता को तुरंत सूचना दें
- कार्ड ब्लॉक कराएं और चार्जबैक की प्रक्रिया शुरू करें
फर्जी ट्रैफिक चालान स्कैम डर और जल्दबाजी का फायदा उठाता है। एक पल की सावधानी आपको लाखों के नुकसान से बचा सकती है।
भुगतान से पहले जांचें, तभी भुगतान करें

