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दिल्ली: पीयूसी सिस्टम में रोबोटिक्स और सेंसर टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी

दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) (पीयूसी) व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। मौजूदा छोटे-छोटे पीयूसी बूथ की जगह अब बड़े, केंद्रीकृत और आधुनिक केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव है। जहां उत्सर्जन जांच का काम मुख्य रूप से सेंसर-आधारित तकनीक से किया जाएगा।

दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक
पीयूसी 2.0 मॉडल को लेकर मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। इसमें पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, परिवहन मंत्री पंकज सिंह और दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में मौजूदा पीयूसी सिस्टम की कमियों की समीक्षा की गई और तकनीक आधारित नए मॉडल पर चर्चा हुई।

दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक
पीयूसी 2.0 मॉडल को लेकर मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। इसमें पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, परिवहन मंत्री पंकज सिंह और दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में मौजूदा पीयूसी सिस्टम की कमियों की समीक्षा की गई और तकनीक आधारित नए मॉडल पर चर्चा हुई।

मानवीय दखल कम करने पर सरकार का फोकस
हालांकि अभी अंतिम योजना को मंजूरी नहीं मिली है। लेकिन सरकार मौजूदा व्यवस्था से हटकर ऐसे विकल्प तलाश रही है, जिनमें मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो।

एक अधिकारी के मुताबिक, लक्ष्य यह है कि रोबोटिक्स और सेंसर आधारित तकनीक के जरिए रियल-टाइम में वाहनों के उत्सर्जन की जांच की जा सके। साथ ही नए पीयूसी केंद्रों के लिए जगह, एंट्री-एग्जिट व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बन सके।

निजी वाहनों तक बढ़ेगा ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि फिलहाल ऑटोमेटेड उत्सर्जन जांच प्रणाली वाणिज्यिक वाहनों के लिए मौजूद है। सरकार की दीर्घकालिक योजना है कि इसी तरह की तकनीक को निजी यानी नॉन-कमर्शियल वाहनों तक भी विस्तार दिया जाए। रिमोट सेंसिंग और रोबोटिक्स के इस्तेमाल से फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम होगी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )