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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों की ‘बड़ी साजिश’ के मामले में सलीम मलिक को जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों की 'बड़ी साजिश' के मामले में सलीम मलिक को जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने सलीम मलिक को 2020 दंगों के मामले में जमानत दी

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में आरोपी सलीम मलिक उर्फ मुन्ना को जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने कहा कि मलिक की भूमिका उन अन्य आरोपियों के समान है जिन्हें पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने पाया कि मलिक पर लगे आरोप स्थानीय स्तर के सहयोगी की श्रेणी में आते हैं, न कि मुख्य साजिशकर्ता की, जिसने कथित बड़ी साजिश की योजना बनाई हो।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मलिक की भूमिका में मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद से कोई बड़ा अंतर नहीं है, जिन्हें इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी। यह निर्णय ‘गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य (दिल्ली सरकार)’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है।

आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मलिक ने बैठकों, विरोध प्रदर्शनों और चक्का जाम में हिस्सा लिया था, जो उन सह-आरोपियों के समान था जिनकी जमानत पहले दी गई थी। जस्टिस सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी नोट किया कि मलिक लगभग पांच साल और दस महीने से हिरासत में हैं, जबकि ट्रायल कोर्ट में अभी भी आरोपों पर बहस जारी है।

कोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ जमानत का आदेश दिया है, जिसमें दो लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड, दो जमानतदार प्रस्तुत करना, बिना अनुमति दिल्ली से बाहर न जाना, पासपोर्ट जमा कराना, और सप्ताह में दो बार क्राइम ब्रांच के एसएचओ के समक्ष पेश होना शामिल है। इसके अलावा, मलिक को गवाहों से संपर्क करने, रैलियों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने, ट्रायल से जुड़ी कोई सामग्री प्रकाशित करने, या संबंधित किसी भी समूह से जुड़ने से मना किया गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मलिक ने फरवरी 2020 में हुई बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाई, विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई, भड़काऊ भाषण दिए, और दंगा फसाद को अंजाम देने में शामिल था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए उल्लेख किया कि मलिक ने साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर रोक अभी भी लागू है।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए यह माना कि मलिक मुख्य साजिशकर्ता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले ऑपरेशनल सदस्य हैं। इस प्रकार, उनकी जमानत उचित ठहराई गई है, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों का पालन करें।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)