दिल्ली में आयोजित होगा जनजातीय सांस्कृतिक समागम, देशभर से होंगे प्रतिभागी
नई दिल्ली। 24 मई को दिल्ली में जनजातीय समुदायों के सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर के विभिन्न जनजातीय समूह भाग लेकर अपनी समृद्ध परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करेंगे। यह कार्यक्रम जनजातीय सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति के संयुक्त तत्वाधान में किया जाएगा।
नरेंद्र भाटिया के अनुसार, इस आयोजन में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागी अपने व्ययस्वयं वहन कर रहे हैं और किसी संगठन द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की जा रही। इसका उद्देश्य है भारत के विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना और उन्हें एक मंच पर लाना। शोभायात्रा के माध्यम से दिल्ली में रहने वाले कई जनजातीय समुदाय अपनी परंपराओं को प्रस्तुत करेंगे तथा आयोजन में सक्रिय रूप से सहयोग देंगे।
इस आयोजन का सामाजिक महत्व भी अत्यंत उच्च है। इससे जनजातीय युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भाषाई और धार्मिक पूर्णता के साथ लोक नृत्य-गीतों की जानकारी प्राप्त होगी। यह जागरूकता उन क्षेत्रों में व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक होगी जहाँ से पलायन होता है। यह पहल जनजातीय विरासत को सहेजने और अन्य सामाजिक चुनौतियों के विरुद्ध एकजुटता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भाटिया ने कहा कि इस समागम में कुछ ऐसे जनजातीय सदस्यों को भी शामिल किया गया है जो आज तक कभी ट्रेन की यात्रा नहीं कर पाए थे। उनके लिए यह आयोजन एक ऐतिहासिक अवसर है जिसमें वे दिल्ली आकर देश की जनजातीय विविधताओं और लोकतांत्रिक वातावरण का अनुभव करेंगे। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आत्मविश्वास मिलेगा तथा विविधताओं में एकता का संदेश मिलेगा।
कार्यक्रम में प्रतिभागी अपनी जातीय विशिष्टताओं को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे, जिससे सांस्कृतिक समझ और सम्मान बढ़ेगा। उनके लौटने पर यह अनुभव उनके क्षेत्रीय जीवन में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करेगा और उन्हें प्रेरित करेगा कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत संरक्षित रखें। इस समागम का उद्देश्य यह भी है कि युवा पीढ़ी संस्कृति की मूल आत्मा से जुड़ी रहे और पलायन की प्रवृत्ति में कमी आए।
नरेंद्र भाटिया का यह भी मानना है कि इस समागम में भाग लेने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान, कलाकार, साहित्यकार, एवं संगीतकार जनजातीय जीवन और परंपराओं पर महत्वपूर्ण विचार प्रकट करेंगे। उनके विचारों और संदेशों से प्रतिभागियों को प्रेरणा मिलेगी एवं युवा पीढ़ी नई दिशा की ओर अग्रसर होगी। ऐसे कार्यक्रम जनजातीय समाज में सामूहिक विकास, जागरूकता, और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं।