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एक अनमोल इंसान जिसने संपादकीय कार्य को कला माना: प्रकाशक कृष्‍ण चोपड़ा को याद करना

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May 24, 2026 #source
‘A very rare human being who treated editorial work as art’: Remembering publisher Krishan Chopra

संपादकीय कला के रूप में एक अनमोल इंसान : कृष्‍ण चोपड़ा को याद करना

1997 के एक शरद पूर्णिमा के दिन दिल्ली के नेहरू प्लेस में पेंगुइन इंडिया के कार्यालय में पहली बार मैं 21 वर्ष का था जब मेरा कृष्‍ण चोपड़ा से परिचय हुआ। उस समय मुझे डेविड डेविडर द्वारा इंटरव्यू के बाद चेन्नई में सेल्स एक्जीक्यूटिव के रूप में नौकरी मिली थी।

नेहरू प्लेस का कार्यालय भले ही भव्य नहीं था, वहां की सीढ़ियां पान के दागों से ग्रस्त थीं और लिफ्ट अक्सर खराब रहती थी। कार्यालय में हमेशा जेनरेटर की गंध रहती थी, जो बाथरूम के पीछे रखा गया था। नियमित बिजली कटौती के कारण जेनरेटर के बंद होने पर वहां का माहौल पूरा ठहर सा जाता था, मानो दिल की धड़कन रुक गई हो। यह एक छोटा, घिनौना सा कार्यालय था, लेकिन भारतीय प्रकाशन जगत के कुछ महान व्यक्ति यहीं कार्यरत थे।

इस मंजिल पर पेंगुइन इंडिया के पहले प्रकाशक एवं सीईओ डेविड डेविडर, अब ऐलेफ बुक कंपनी के संस्थापक, रवि सिंह जो टाइगर बुक्स के संस्थापक-प्रकाशक हैं, कर्थिका वीके, जो वेस्टलैंड बुक्स में प्रकाशक हैं, उदयन मित्रा जो हार्पर कॉलिन्स इंडिया में कार्यरत हैं, और हेमाली सोढी जो ए सूटेबल एजेंसी की संस्थापक हैं, जैसे कई नामी संपादक कार्यरत थे।

कृष्ण चोपड़ा ने अपने सम्पादकीय दृष्टिकोण को केवल पेशे के रूप में नहीं बल्कि एक कला के रूप में पहचाना। उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने भारतीय प्रकाशन जगत में अतुलनीय योगदान दिया। उनका दृष्टिकोण कलाकार की तरह गहन था, जो हर पुस्तक में जीवंतता डालने का प्रयास करता था।

उनकी यह प्रतिबद्धता और रचनात्मकता आज भी प्रकाशन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रेरणा के रूप में देखी जाती है। कृष्‍ण चोपड़ा के योगदान को याद करते हुए, हम यह समझते हैं कि संपादकीय कार्य केवल शब्दों का संशोधन नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट कृति के निर्माण की प्रक्रिया है।

उनका कार्य क्षेत्र कई बार चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उनकी सकारात्मक सोच और कला की समझ ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ाया। भारतीय प्रकाशन के इतिहास में कृष्‍ण चोपड़ा का नाम एक चमकदार सितारे की तरह अंकित है, जिसे हम सब सम्मानपूर्वक याद करते हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)