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विट्ठलभाई पटेल के कार्यकाल की 400 बैठकों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक : विजेंद्र गुप्ता

विट्ठलभाई पटेल के कार्यकाल की 400 बैठकों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक : विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली विधानसभा में विट्ठलभाई पटेल के कार्यकाल की 400 बैठकों का अभिलेख सार्वजनिक

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा परिसर में गुरुवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय विधानसभा की 1924 से 1930 तक की कार्यवाहियों का विस्तृत संकलन जारी किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस संग्रह का लोकार्पण किया, वहीं मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि यह केवल पुस्तकों का विमोचन नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक विरासत को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। विट्ठलभाई पटेल, जो देश के पहले भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष थे, उन्होंने लगभग 400 बैठकों का सफल नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल की पूरी कार्यवाही अब दस्तावेजों के रूप में उपलब्ध कराई गई है, जिससे नई पीढ़ी भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को समझ सके।

विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि आज की दिल्ली विधानसभा आधुनिक तकनीकी नवाचारों को अपनाकर पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटाइज्ड हो चुकी है तथा इसमें सौर ऊर्जा का भी उपयोग होता है। इसके साथ ही इतिहास और विरासत को बचाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विधानसभा परिसर में एक संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जहां भारतीय लोकतंत्र और विधानसभा भवन से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस पहल की प्रशंसा की और बताया कि विजेंद्र गुप्ता के अध्यक्ष बनने के बाद से विधानसभा के इस ऐतिहासिक भवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह भवन कभी देश के केंद्रीय सचिवालय के रूप में कार्य करता था, जहां सांसदों जैसी व्यवस्था पहले भी लागू थी और विट्ठलभाई पटेल जैसे महान नेताओं ने इसका नेतृत्व किया।

मनोज तिवारी ने उल्लेख किया कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में भी भारतीय नेताओं ने जनविरोधी विधेयकों का दृढ़ता से विरोध किया। कई ऐसे बिल इसमें खारिज किए गए। उन्होंने कहा कि उस समय पूरी दुनिया में अंग्रेजों का प्रभुत्व था, फिर भी भारतीय नेताओं ने इसी सदन में लोकतांत्रिक ताकत का प्रदर्शन किया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को संविधान तो 1950 में मिला, पर लोकतांत्रिक सोच और संसदीय परंपराएं उससे कहीं पहले से अस्तित्व में थीं। विट्ठलभाई पटेल जैसे नेता तत्कालीन समय में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को दृढ़ता से लागू करते रहे।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)