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आरबीआई एमपीसी बैठक आज से शुरू: महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर रहेगी नजर

आरबीआई एमपीसी बैठक आज से शुरू : महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर रहेगी नजर

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक: ब्याज दरों में यथास्थिति के संकेत

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से प्रारंभ हो गई है। इस महत्वपूर्ण बैठक में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इस बार ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव अपेक्षित नहीं है।

ब्याज दरों में यथास्थिति: विशेषज्ञों का अनुमान– फिलहाल बदलाव नहीं

  • वैश्विक अनिश्चितता: तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी चुनौती
  • महंगाई का दबाव: मानसून और ईंधन कीमतों से बढ़ी चिंता
  • आर्थिक वृद्धि अनुमान: 2026-27 में जीडीपी 6.7% रहने की संभावना
एमपीसी की यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ये परिस्थितियां आर्थिक स्थिरता पर असर डालने वाली हैं, जिसके कारण केंद्रीय बैंक की चुनौतियां और अधिक जटिल हो गई हैं।

अधिकांश अर्थशास्त्री मानते हैं कि आरबीआई इस बार ब्याज दरों को अपरिवर्तित रख सकता है। हालांकि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक का रुख पहले के मुकाबले अधिक सतर्क या कड़क हो सकता है।

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में ब्याज दरों को स्थिर रखा जाएगा, लेकिन आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र की परिस्थितियों के आधार पर जरूरत पड़ने पर सख्ती लागू की जा सकती है। उन्होंने बाजार की उम्मीदों का हवाला देते हुए कहा कि 2026 की अंतिम तिमाही से ब्याज दरों में कटौती की संभावना है।

भंडारी ने यह भी बताया कि आरबीआई के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष नजर रहेगी, खासकर ऊर्जा क्षेत्र के उतार-चढ़ाव पर। यदि कच्चे तेल की औसत कीमतों का अनुमान लगभग 85 डॉलर से बढ़कर ज्यादा होता है, तो महंगाई के स्तर में भी वृद्धि देखी जा सकती है।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में मानसून के सामान्य से कम रहने और ईंधन की बढ़ती कीमतों को महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि थोक महंगाई में बढ़ोतरी का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेज हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल महंगाई में वृद्धि मांग के बजाय आपूर्ति पक्ष की समस्याओं के कारण हो रही है। इस बीच, केयरएज ने वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर को 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है, बशर्ते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी रहें।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो आर्थिक विकास दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत रह सकती है।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट भी महंगाई जोखिमों और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने का सुझाव देती है। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.5 प्रतिशत के लगभग रहने का अनुमान है। साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई कई तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी ब्याज दरों की स्थिर स्थिति बनाए रखने की संभावना जताई है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई कमी और वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार से आरबीआई को राहत मिली है।

ब्रोकरेज के मुताबिक यदि तेल की कीमतें और कम होती हैं तथा भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो इससे भारतीय रुपए को मजबूती मिलेगी और केंद्रीय बैंक को लंबी अवधि तक ब्याज दरें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)