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भारत-ब्रिटेन की साझेदारी में क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी लॉन्च

भारत-ब्रिटेन की साझेदारी में क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी लॉन्च

भारत-ब्रिटेन की साझेदारी में क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी का औपचारिक शुभारंभ

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी के लिए एक नई पहल ‘‘क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी’’ को गुरुवार को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। यह कदम दोनों देशों के बीच आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा एवं उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की प्राथमिकता को दर्शाता है।

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी तथा ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों की राज्य सचिव यवेट कूपर ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में इस पहल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह ऑब्जर्वेटरी दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करते हुए जरूरी मिनरल्स की उपलब्धता के जोखिमों का मूल्यांकन साबित करेगी।

मंत्री रेड्डी ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक आर्थिक विकास की आधारशिला हैं, खासकर स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, उन्नत निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और अन्य रणनीतिक उद्देश्यों के लिए। इस ऑब्जर्वेटरी के माध्यम से भारत और ब्रिटेन को नीतिगत निर्णय लेने में अधिक मजबूत और साक्ष्य-आधारित सूचनाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) के लक्ष्यों के साथ इस पहल के मेल को भी रेखांकित किया।

ब्रिटेन की राज्य सचिव यवेट कूपर ने कहा कि इस वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता और पारदर्शिता दोनों देशों के आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। बेहतर जानकारी के आदान-प्रदान से महत्वपूर्ण संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और हरित एवं टिकाऊ विकास को गति मिलेगी। उन्होंने भारत-ब्रिटेन साझेदारी को इस क्षेत्र में रणनीतिक एवं दीर्घकालिक सहयोग का आधार बताया।

यह पहल टेक्समिन (टेक्नोलॉजी इनोवेशन इन एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग फाउंडेशन) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) ISM धनबाद तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित एक डेटा-चालित प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य विश्वव्यापी जरूरी मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला का निगरानी, विश्लेषण व जोखिम मूल्यांकन करना है।

इस पहल की घोषणा अक्टूबर 2025 में भारत एवं ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई वार्ता के दौरान की गई थी और मार्च 2026 में एक अनुसंधान सहयोग समझौते के तहत इसे औपचारिक रूप दिया गया। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

आईआईटी (ISM) धनबाद के निदेशक और टेक्समिन के गवर्निंग बोर्ड के चेयरमैन सुकुमार मिश्रा ने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भारत की क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने में मदद करेगा और क्रिटिकल मिनरल की आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय एवं लचीला बनाएगा।

इस ऑब्जर्वेटरी के इंटरैक्टिव डेमोंस्ट्रेशन को टेक्समिन और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिससे नीति निर्धारकों, उद्योग एवं शोध समुदाय को निर्णय लेने में सहजता और बेहतर दिशा मिलेगी।

संक्षेप में, यह वैश्विक प्लेटफॉर्म भारत-ब्रिटेन के बीच रणनीतिक खनिज सहयोग को दृढ़ करते हुए प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं सुरक्षित प्रबंधन में नई दिशा प्रदान करेगा। इससे दोनों देशों के आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)