नीट अभ्यर्थी की आत्महत्या पर उठे सवाल, शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर बवाल
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा अकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठा दिए हैं। नागपुर में 20 मई को हुई इस दुर्घटना ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी चर्चा तेज कर दी है।
अकांक्षा चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के मउगंज निवासी थीं और नागपुर के एक कोचिंग सेंटर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। उनकी मौत के लगभग दो सप्ताह बाद, उनके परिवार को एक हस्तलिखित पत्र मिला जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे “फिर से NEET परीक्षा देने का साहस नहीं रखती”।
इस घटना के बाद, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नीतियों की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने परीक्षा की व्यवस्था को दुरुस्त करने में विफलता दर्शाई है, विशेषकर पेपर लीक और मूल्यांकन में ग्रेस अंक देने के गंभीर आरोपों के बीच।
इस साल 3 मई को आयोजित इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लेकिन, 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने पेपर लीक के आरोपों के चलते NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया। इससे पूर्व भी 2024 के राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के दौरान पेपर लीक और नियमों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।
नागपुर पुलिस ने अकांक्षा की मौत को आकस्मिक घटना बताया और शुरू में आत्महत्या का कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात कही। हालांकि, परिवार द्वारा मिलने वाले पत्र ने इस दावे को चुनौती दी है। इस मामले की पड़ताल जारी है।
शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की चुनौतियां ऐसे दर्दनाक घटनाओं के पीछे गहराई से जांच और सुधार की मांग कर रही हैं। शिक्षा प्रणाली को मजबूती देने के लिए समुचित पारदर्शिता एवं समर्थन आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।