पीएफआई मामलों में तगड़ा शिकंजा : कोर्ट ने 21 आरोपियों पर लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चेयरमैन ओएमए सलाम, वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर सहित 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिये हैं। अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
अदालत ने सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचना, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करने तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद से जुड़े विभिन्न आरोप लगाए हैं। एनआईए ने आरोपितों पर फंड जुटाने, आतंकवादी साजिश रचने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और लोगों की भर्ती जैसी गंभीर गतिविधियों का आरोप लगाया है।
इस मामले में सितंबर 2022 में एनआईए ने देश भर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का मानना है कि पीएफआई के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन की गतिविधियों को संचालित करते हुए कथित राष्ट्रविरोधी योजनाओं को आगे बढ़ाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह लगता है कि आरोपी पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद (एनईसी) के माध्यम से भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने और 2047 तक या उससे पहले इस्लामी खिलाफत के लिए शरिया कानून लागू करने की साजिश में शामिल थे। अदालत ने बताया कि यह योजना राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के जरिये पूरी की जानी थी।
अदालत ने बताया कि ‘विजन 2047’ नामक दस्तावेज पीएफआई का प्रमाणित दस्तावेज है। अदालत ने कहा कि हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इराक तथा सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को समर्थन देने जैसे निर्णय संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में लिए गए थे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये अपराध किसी एक व्यक्ति के निजी कार्य नहीं बल्कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशन में किए गए थे। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी तथा उस दिन सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।