दिल्ली में पर्यावरण और संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी
दिल्ली की एक महत्वपूर्ण भूमि जयपुर पोलो ग्राउंड के अधिग्रहण के प्रस्ताव को लेकर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उचित सावधानी और नियमों का पालन नहीं किया गया तो राजधानी की हवा और पर्यावरण को भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने मामला उठाते हुए कहा कि बिना रणनीतिक योजना और पर्यावरणीय प्रभावों के मूल्यांकन के इस तरह के अधिग्रहण से दिल्ली का स्वच्छ वातावरण और जीवनमान प्रभावित होगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार से परियोजना की योजना पर दोबारा विचार करने और जनता के हित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
जयपुर पोलो ग्राउंड, जो दिल्ली में एक महत्वपूर्ण हरे-भरे क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, एक लंबे समय से सड़कों के पास सार्वजनिक स्थान और खेलकूद की सुविधा प्रदान करता रहा है। अधिग्रहण की योजना ने स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों के बीच चिंता और विरोध को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं बिना व्यापक शोध और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के लागू करना न केवल पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक असंतोष भी बढ़ाता है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रक्रिया में स्थानीय हितधारकों को शामिल करने की आवश्यकता जताई है।
इस आदेश के मद्देनजर संभावना है कि केंद्र सरकार प्रस्तावित योजना में संशोधन करेगी, ताकि दिल्ली के पर्यावरण और आम जनता के हितों की रक्षा की जा सके। न्यायालय की यह देखरेख एक उदाहरण है कि न्यायपालिका किस प्रकार सरकारी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है।