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लोककथा: राजा की जुड़वां राजकुमारियां हो सकती हैं दुर्भाग्यशाली, पर वे पूर्ण जीवन जीने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं

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Jun 9, 2026 #source
Folktale: The king’s twin princesses might be ill-fated. But they’re determined to live full lives

चांदपुरगढ़ की जुड़वां राजकुमारियों की साहसिक जीवनगाथा

हिमालय के तलहटी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन किले में जन्मीं जुड़वां राजकुमारियां, नन्दा और सुनन्दा, अपने भाग्य को चुनौती देते हुए जीवन की गागर भरना चाहती हैं।

यह किला चांदपुरगढ़ के शिकारी जाति का राजकीय निवास है, जो चट्टानी पहाड़ की कंधे पर समाहित है। यहाँ से नीचे गहरी घाटी में अलकनंदा और पिंडर नदियां हिमनदों से निरंतर गर्जन करती बह रही हैं, जो घाटी की प्राकृतिक सुंदरता को चार चाँद लगाती हैं। दूर छुपे हुए पर्वतों के शिखर बादलों में लिपटे हुए, प्रकृति की छटा को और मनोहारी बना देते हैं।

नन्दा और सुनन्दा, इस लड़ाकू वंश की संततियाँ, पारंपरिक राजकुमारी के बजाय साहसी युवा योद्धा के रूप में पली-बढ़ी हैं। उन्होंने लड़कों के साथ कठोर प्रशिक्षण ग्रहण किया है, जिसमें तीरंदाजी, तलवारबाजी, घुड़सवारी और सैन्य कौशल शामिल हैं। इनके गुरु ब्राह्मण पुरोहित और विद्वान शास्त्री थे, जो युद्ध कौशल, राज्य प्रशासन, कूटनीति तथा धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान प्रदान करते थे।

संस्कृति और कला से भी ये दोनों राजकुमारियां पूर्णतः जुड़े हुए हैं। वे संगीत, चित्रकला, और साहित्य का आनंद उठाती हैं, जो उनकी व्यक्तित्व में सौंदर्य और ज्ञान दोनों का संयोग दर्शाता है। इतिहास और परंपरा के माध्यम से स्थापित इस परिवार में भी शायद नसीब ने उनके लिए कठिनाइयाँ रखी हों, लेकिन इनके हौसले ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

नन्दा और सुनन्दा की कहानी हमें यह सिखाती है कि चाहे भाग्य कैसा भी हो, इच्छाशक्ति और कठोर परिश्रम से जीवन को समृद्ध और पूर्ण बनाया जा सकता है। उनके संघर्ष और उपलब्धियाँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमाओं को तोड़कर नई ऊँचाइयाँ छूना चाहते हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)