राहुल गांधी के खिलाफ FIR न दर्ज करने के निर्णय को वाराणसी कोर्ट ने रद्द किया
वाराणसी की एक विशेष अदालत ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ उनके द्वारा भगवान राम को ‘पौराणिक’ कहे जाने से संबंधित शिकायत को लेकर एफआईआर दर्ज करने से इंकार करने वाले पहले के आदेश को रद्द कर दिया। इस मामले की समीक्षा अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश ने की।
यह मामला मई महीने में विशेष मजिस्ट्रेट के उस आदेश के विरुद्ध पेश किया गया था, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को असंगत बताते हुए खारिज कर दिया गया था। बुधवार को न्यायाधीश ने मामले को सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के निर्णयों के संदर्भ में पुनः सुनवाई के लिए निर्देशित किया।
मूल शिकायत एक अधिवक्ता द्वारा दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि राहुल गांधी के बयानों से नफरत फैलती है और वे विवादित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने सनातन धर्म के पूर्ववतों और प्रतिष्ठित प्रतीकों के संबंध में बार-बार अनुचित टिप्पणियां कीं और हिंदुओं का अपमान किया जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं।
सनातन धर्म शब्द का उपयोग कभी-कभी हिंदू धर्म के पर्याय के रूप में किया जाता है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी द्वारा दिए गए ये भाषण घृणा फैलाने वाले हैं और ये ‘गंभीर आपराधिक अपराध’ के अंतर्गत आते हैं।
शिकायत में यह भी तर्क दिया गया कि ऐसे बयान सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर फैसले की पृष्ठभूमि में और भी अधिक निंदनीय हैं। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस हिंदुत्व समर्थकों द्वारा इसलिए किया गया था क्योंकि उन्हें विश्वास था कि मस्जिद का स्थान भगवान राम के जन्मस्थान पर था।
अब विशेष अदालत को निर्देश मिला है कि वह इस मामले की पुनः सुनवाई करे और उचित न्याय प्रदान करे। इस फैसले से राजनीतिक व धार्मिक चर्चा में नई गूंज मची है और यह भाजपा एवं कांग्रेस जैसी पार्टियों के बीच जारी राजनीतिक टकराव में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
मामले की अगली सुनवाई में न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी धाराओं के आधार पर निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद की जा रही है। यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सतर्क है।