एमसीडी ने इंदौर और सूरत के सफल मॉडल की तर्ज पर राजधानी में पांच अत्याधुनिक फूड हब बनाने की योजना बनाई है। जहां रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को भी स्थायी जगह मिलेगी।
राजधानी में स्ट्रीट फूड संस्कृति को नया और व्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में एमसीडी ने बड़ी पहल की है। विदेशों के आधुनिक फूड कोर्ट और भारत के इंदौर व सूरत जैसे सफल मॉडलों की तर्ज पर राजधानी के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक फूड हब विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इस संबंध में एमसीडी ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर पांच स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे मिलने वाले खानपान का आनंद लेते हैं। इस तरह राजधानी की पहचान उसके विविध स्ट्रीट फूड से भी जुड़ी हुई है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर फूड स्टॉल अव्यवस्थित तरीके से संचालित होते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम, स्वच्छता और अतिक्रमण जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए निगम ने आधुनिक फूड हब विकसित करने की योजना बनाई है। अधिकारियों के मुताबिक, सलीम गढ़ किला के सामने, पीतमपुरा स्थित टीवी टावर के पास, रिंग रोड स्थित मिलेनियम पार्क, जनकपुरी डिस्टि्रक सेंटर व वसंत विहार में प्रस्तावित फूड हब में स्वच्छ और व्यवस्थित फूड स्टॉल, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग, पेयजल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि योजना तैयार करने से पहले देश और विदेश के कई सफल मॉडलों का अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से इंदौर के प्रसिद्ध छप्पन दुकान और सराफा बाजार के मॉडल को ध्यान में रखा गया है, जहां स्ट्रीट फूड को व्यवस्थित स्वरूप देकर पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बनाया गया है। इसके अलावा सिंगापुर, दुबई और अन्य देशों के फूड कोर्ट एवं हॉकर सेंटर मॉडल का भी अध्ययन किया गया है।पांचों प्रस्तावित स्थानों पर एमसीडी के पास जमीन नहींएमसीडी के अनुसार, पांचों प्रस्तावित स्थानों पर एमसीडी के पास जमीन नहीं है। इन स्थानों पर केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों की भूमि है। इस कारण केंद्र सरकार से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इन स्थानों पर भूमि मिलने और आवश्यक मंजूरियां प्राप्त होने के बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस तरह आने वाले वर्षों में दिल्ली को भी इंदौर और सूरत की तरह विश्वस्तरीय फूड हब मिल सकेंगे, जो राजधानी की नई पहचान बनेंगे।

