हरियाणा की शिक्षिका का प्रदर्शन में भाग लेने के बाद निलंबन
हरियाणा के रोहतक में एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दो दिन बाद निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उसने 6 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह जानकारी The Hindu ने गुरुवार को दी।
सुलेखा डालाल, जो रैनकपुरा के सरकारी मिडिल स्कूल में शिक्षिका हैं, को 10 जून को जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी द्वारा एक आदेश जारी कर 8 जून से प्रभावी निलंबित कर दिया गया। आदेश में निलंबन का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
हालांकि, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी बिजनदर हूडा ने The Hindu से बात करते हुए कहा कि डालाल ने ‘‘सरकारी कर्मचारियों के आचार संहिता का उल्लंघन किया है क्योंकि उन्होंने बिना पूर्व अनुमोदन के अपनी ड्यूटी स्थल छोड़कर प्रदर्शन में भाग लिया।’’
काकरोच जनता पार्टी के ये प्रदर्शन मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हेतु व्याप्त पेपर लीक के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की रद्दीकरण के बाद हुए थे।
छात्रों एवं नौकरी चाहने वालों ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित कक्षा 12 की परीक्षा और स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की परीक्षा में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
डालाल के खिलाफ यह कार्रवाई एक वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद हुई, जिसमें उन्हें प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए दिखाया गया है।
वीडियो में उन्होंने इस प्रदर्शन को ‘‘करो या मरो’’ की लड़ाई बताया और कहा कि वे एक मां के रूप में बच्चों का समर्थन करने के लिए हिस्सा ले रही हैं, The Indian Express ने बताया।
सरकारी अधिकारियों और शिक्षा विभाग द्वारा इस मामले में आगे की जांच जारी है। यह मामला शिक्षा क्षेत्र में कर्मचारियों के अधिकार और प्रदर्शन में भागीदारी के बीच संतुलन के सवाल को भी जन्म देता है।
इस घटना का व्यापक स्तर पर सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों में चर्चा हो रही है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की सार्वजनिक गतिविधियों पर नियंत्रण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों ही मुद्दे शामिल हैं।