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पहली बार रेलवे ने दादर-धरावी नाला साफ करने के लिए ऑक्सीजन इंजेक्शन का किया उपयोग

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Jun 13, 2026 #bmc, #source
First Time Ever Railways Use Oxygen Injection to Clean Dadar-Dharavi Nullah

दादर-धरावी नाला साफ़ करने हेतु रेलवे ने पहली बार अपनाई ऑक्सीजन इंजेक्शन तकनीक

मुंबई में प्री-मॉनसून कार्यों के तहत रेलवे अधिकारियों ने दादर-धरावी नाले के 250 मीटर के हिस्से को साफ करने के लिए पहली बार ऑक्सीजन इंजेक्शन की नई तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक के जरिए कामगारों को सुरक्षित रूप से अवरुद्ध हिस्से से भारी कीचड़ हटाने में मदद मिली।

यह नाला मुथी नदी को रेलवे के कल्वर्ट से जोड़ता है, जो रेलवे ट्रैक से वर्षा जल को बहार निकालते हैं। मटुंगा रेलवे कार्यशाला के नीचे यह हिस्सा एक समस्या क्षेत्र रहा है क्योंकि यह भाग दोनों, वेस्टर्न रेलवे और सेंट्रल रेलवे जोन के अंतर्गत आता है।

मटुंगा-दादर के इस खंड में भारी वर्षा के दौरान जलजमाव की पुरानी समस्या रही है। यह हिस्सा कीचड़, मलबा और गलते कचरे से अक्सर जम जाता है, जिससे जल प्रवाह बाधित होता है और जल पलटाव होता है। परिणामस्वरूप पानी रेलवे ट्रैक पर जमा हो जाता है, जिससे बाढ़ के बाद नाली की निकासी धीमी पड़ जाती है और ट्रेन सेवा प्रभावित होती है।

सूत्रों के अनुसार इस हिस्से को साफ करना वर्षों से चुनौतीपूर्ण रहा है। बंद नालों और गटरों के अंदर मीथेन जैसे हानिकारक गैसें जमा हो जाती हैं, जो कर्मचारियों के लिए जोखिम उत्पन्न करती हैं। इस समस्या को हल करने के लिए इंजीनियरों ने भारी एयर ब्लोअर का उपयोग किया। इन ब्लोअर ने मीथेन गैस को बाहर निकाला और विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजन भर दी, जिससे नाले के अंदर का वातावरण सुरक्षित हुआ और सफाई कार्य लगभग 12 से 15 दिनों में पूरा हुआ।

ऑक्सीजन इंजेक्शन के बाद स्वच्छता कर्मचारी नाले में प्रवेश कर कीचड़ हटाने का कार्य संपन्न किया। इस अभियान को ब्रिहन्मुम्बई नगरपालिका निगम (BMC) का भी सहयोग मिला। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक उन जगहों पर विशेष रूप से प्रभावी है जहां सीधे पहुंचना कठिन होता है। कुछ हिस्सों में ऊपरी भाग को खोलकर गैसों के तेजी से बाहर निकलने की व्यवस्था की गई।

साथ ही सुपर-सकर मशीनों का प्रयोग भी किया गया, जिन्होंने बड़ी मात्रा में कीचड़, तैरते कचरे और मलबे को हटाया। इन्हीं एकत्रित पदार्थों के कारण नाले की जल निकासी क्षमता समय के साथ कम हो गई थी। सफाई के पश्चात मूल जल प्रवाह पुनः स्थापित हो गया। मटुंगा कार्यशाला से रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स बाराक तक पीढ़े और कचरे की सफाई भी की गई। कल्वर्ट के माध्यम से मुथी नदी में जल प्रवाह में भी सुधार हुआ है।

सफाई के साथ-साथ रेलवे ने बुनियादी ढांचे में सुधार भी किया। कुछ हिस्सों में ट्रैक स्तर को बढ़ाया गया है। मटुंगा से माहिम के बीच 100 मीटर के ट्रैक को लगभग 5.5 से 6 इंच ऊपर उठाया गया। नाली प्रणालियों के विकास और निगरानी प्रणालियों की स्थापना भी की गई है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)