फर्जी संदर्भ और भ्रामक अध्ययनों से खटाई में फंसी सरकारें: एआई के पांच प्रमुख मामलों पर एक नजर
आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने दुनिया के कई क्षेत्रों में क्रांति ला दी है, लेकिन इसके साथ ही यह विभिन्न गलतफहमियों और भूल-चूक का भी स्रोत बनी है। हाल ही में, सरकारों के दस्तावेजों और नीतियों में एआई द्वारा निर्मित झूठे संदर्भ और गैर-मौजूद अध्ययनों ने गहरी चिंता उत्पन्न की है। इस लेख में हम पाँच प्रमुख घटनाओं पर चर्चा करेंगे जहां एआई की भ्रांतियां सरकारों को कठिन स्थिति में डाल चुकी हैं। अप्रैल माह में दक्षिण अफ्रीका सरकार ने अपनी प्रारूप राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति को केवल 17 दिन बाद वापस ले लिया, क्योंकि उस दस्तावेज़ में एआई द्वारा उत्पन्न कई फर्जी शोध संदर्भ पाए गए थे। यह उस ऐतिहासिक क्षण को धूमिल कर गया था जब दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका का पहला ऐसा देश बनना चाहता था जिसने पश्चिम के बाहर एआई की निगरानी के लिए औपचारिक एथिक्स बोर्ड स्थापित किया था। संचार और डिजिटल प्रौद्योगिकी मंत्री सॉली मलात्सी ने कहा, “सबसे संभावित कारण यह है कि एआई-जनित संदर्भ उचित सत्यापन के बिना शामिल किए गए थे। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” यह पहली बार था जब किसी सरकार ने एआई के भ्रम के कारण दस्तावेज़ वापस लिया हो, लेकिन ऐसा अकेले दक्षिण अफ्रीका में नहीं हुआ। विश्व के कई हिस्सों में सरकारी या अर्ध-सरकारी दस्तावेजों में एआई-जनित सामग्री ने अपनी जगह बनाई है, जिससे जिम्मेदारी और मानवीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।पाँच बार एआई ने सरकारों को फँसाया
- दक्षिण अफ्रीका की एआई नीति: अप्रैल में प्रकाशित मसौदा राष्ट्रीय एआई नीति में 67 स्रोतों में से कम से कम 6 संदिग्ध थे, जिनमें एआई द्वारा निर्मित शोध कथाएँ शामिल थीं।
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