रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विदेशी विनिमय भंडार में लगभग 10 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब 671 अरब डॉलर पर आ गया है। यह आंकड़ा 12 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान लगभग 82,100 करोड़ रुपए की कमी दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, में 5 जून से 12 जून के बीच 846 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह अब 544.2 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं। वहीं, इस अवधि के दौरान सोने के भंडार में 10.7 अरब डॉलर की भारी गिरावट देखी गई, जो अब 103.8 अरब डॉलर रह गया है।
विदेशी विनिमय भंडार की यह गिरावट वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं और वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है। इसके अलावा, सोने के भंडार में कमी का कारण संभवतः केंद्र सरकार द्वारा संचालित विदेशी विनिमय नीति और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में बदलाव है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह आंकड़ा गंभीर संकेत देता है, क्योंकि बड़ी विदेशी मुद्रा निधि देश की वित्तीय सुरक्षा और विनिमय दर स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी भंडार में निरंतर गिरावट से आर्थिक नीति नियंताओं को सतर्क रहना होगा और संभावित उपायों पर विचार करना होगा।
इस संदर्भ में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नीतियाँ और वैश्विक आर्थिक माहौल देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रभाव डालते रहेंगे, जो समग्र आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी हैं।
संख्या और तथ्य रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए आधिकारिक डेटा पर आधारित हैं।