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महिला नरभक्षी: उभरती हॉरर फिक्शन प्रवृत्ति के पीछे की सच्चाई

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Jun 27, 2026 #best, #bloom, #eyes, #hunger, #Part
Female cannibals: What’s behind the emerging horror fiction trend?

महिला नरभक्षी: हॉरर फिक्शन की नई लहर

हॉरर साहित्य में एक नई प्रवृत्ति उभरकर सामने आई है — महिला नरभक्षी। मोनिका किम की पुस्तक The Eyes are the Best Part (2025) में एक कॉलेज की छात्रा ऐसे पुरुषों की आंखें खाती है जो उसे आकर्षक मानते हैं। डेलीला एस डॉसन के Bloom (2023) में प्रेमिका, जो एक आदर्शकट्टे जीवन व्यतीत कर रही प्रतीत होती है, असल में अपने ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों में मानव अंग शामिल करती है। चेल्सिया जी समर्स के उपन्यास A Certain Hunger (2021) में एक निर्दयी फूड क्रिटिक अपने प्रेमियों को पकाकर खाती है।

पिछले वर्ष ही कई उपन्यासों में नरभक्षी पात्र देखे गए: लुसी रोज़ का साहित्यिक लोक हॉरर उपन्यास The Lamb, ओलिविया ब्लेक की Girl Dinner, तथा कैथरीन डैंग का What Hunger। ये सभी लिंग लिंग हुंग के Natural Beauty (2023), सायक मुराता के Earthlings (2020) जैसे पहले से मौजूद कृतियों का अनुसरण करते हैं।

नरभक्षिता हॉरर साहित्य का नया विषय नहीं है। इसके पहले से The Texas Chain Saw Massacre के लेदरफेस, The Silence of the Lambs के हानिबल लेक्टर और Solyent Green के मानव-भक्षी पात्र प्रसिद्ध हैं। यहां तक कि Apple की हालिया श्रृंखला Pluribus में भी इस विषय को समाहित किया गया है।

नारीवादी नरभक्षी

लेकिन इस नई लहर की खास बात है कि ये उपन्यास महिलाएं लिख रही हैं। इन पुस्तकों में पुरुषों को खाने वाली नायिकाएं न केवल रक्तरंजित और भयानक हैं, बल्कि वे नारीवादी दृष्टिकोण से भी समृद्ध हैं। महिला नरभक्षी एक ऐसी क्रांतिकारी छवि बन चुकी है, जो अपनी इच्छाओं को अधिकारपूर्वक पूरा करती है। ये कहानियां महिलाओं की हिंसक, क्रोधित एवं प्रतिरोधी प्रवृत्ति को उजागर करती हैं।

हॉरर साहित्य तब फलता-फूलता है जब समाज में बेचैनी होती है। 18वीं सदी के अंत में प्रसिद्ध लेखिका ऐन रैडक्लिफ, शार्लोट पर्किन्स जैसे लेखकों ने इस विधा को विकसित किया, जो आज भी महिलाओं के जुझारूपन और सामाजिक बदलाव की कहानियों को परोसा जाता है।

इस प्रकार, महिला नरभक्षक पात्र न केवल हॉरर कथा को नया जीवन दे रहे हैं, बल्कि वे महिलाओं के चरित्र में झांक कर नई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विमर्श भी खोल रहे हैं। यह प्रवृत्ति आज के युग में लैंगिक समानता, आत्मनिर्णय और शक्ति की गूँज बनकर उभरी है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)