सेशेल्स के राष्ट्रीय सम्मान में टाइपो से उठे सवाल, पीएम मोदी के प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता पर संशय
सेशेल्स द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए राष्ट्रीय सम्मान के प्रमाण पत्र में हुए वर्तनी त्रुटियों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। इस मामले ने दस्तावेज की प्रामाणिकता को लेकर कई प्रश्न उठाए हैं।
सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने रविवार को प्रधानमंत्री मोदी को “गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन” पुरस्कार दिया। यह सम्मान सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान प्रदान किया गया। मोदी इस आयोजन में मुख्य अतिथि थे।
सेशेल्स सरकार द्वारा इसे देश का सर्वोच्च राष्ट्रपति सम्मनित दर्जा बताया गया है, जो 24 जून को मोदी के दौरे से तीन दिन पहले स्थापित किया गया था।
पुरस्कार में मोदी के नेतृत्व, सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और छोटे द्वीप विकासशील राज्यों की आकांक्षाओं के समर्थन के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। यह प्रमाण पत्र दोतरफा संबंधों में उनके योगदान को सराहने के लिए भी था।
हालांकि, सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं ने प्रमाण पत्र में वर्तनी की गलतियों को तुरंत पहचान लिया, जहां “रेपब्लिक” को “रेपब्लिक” के बजाय “रेपूब्लिक” और “सेशेल्स” को “सेयचेल्स” के बजाय “सेयचील्स” लिखा गया था।
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि इतनी जल्दबाजी में पुरस्कार का नाम तक गलत छप गया। पार्टी की नेता सुप्रिया श्रीनिवास ने कहा, “सेशेल्स ने सम्मान चार दिन पहले बनाया और मोदी जी जल्दबाजी में इसे लेने पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने 1500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की।”
यह विवाद प्रधानमंत्री मोदी को दी जाने वाली पुरस्कारों के औपचारिकता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है, जो अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।