अयोध्या बार एसोसिएशन ने राम मंदिर दान मामले में आरोपियों की पैरवी करने से मना किया
अयोध्या बार एसोसिएशन ने राम मंदिर में दिए गए दान की कथित अनुचित कटौती के मामले में आरोपी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने से इनकार कर दिया है। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और नैतिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
असोसिएशन के अध्यक्ष कालीका प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वकील यदि इस मामले में आरोपियों का पक्ष रखेगा, तो उसके खिलाफ पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में आठ व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, जिनमें से सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्राथमिकी में नामित आरोपी रामाशंकर यादव (टिन्नू), अनकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा एवं सुबोध श्रीवास्तव शामिल हैं।
कालीका प्रसाद मिश्र ने बताया कि इस मुकदमे की पैरवी के लिए 15 से 20 सदस्यों की एक समिति गठित की गई है जो पूरे मामले को गंभीरता से संभालेगी। साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से इस मामले की जांच की मांग भी उठ रही है।
अध्यक्ष ने कहा कि “लोग आरोप लगा रहे हैं कि जब पाँच व्यक्ति दान की राशि का स्थानीय उपयोग कर रहे हैं, तो प्रश्न उठता है कि भगवान को चढ़ाए गए भेंटों का मकसद क्या रह जाता है। आरोप यह भी हैं कि जेल में बंद आरोपी तो अभियुक्त हैं, परंतु कुछ और लोग, जो कहीं अधिक दोषी हैं, अभी तक मामले में फंसे नहीं हैं।”
उन्होंने माना कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की सहमति या जानकारी के बिना इस तरह का गबन संभव नहीं था। यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से संवेदनशील है, इसलिए न्यायालयीन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
अयोध्या बार एसोसिएशन का यह फैसला समुदाय के विश्वास को बनाए रखने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है और विधिक क्षेत्र में नैतिकता की बहाली की कोशिश है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच-परख और न्यायिक कार्रवाई की गति पर सभी की नजरें हैं।