आईआईटी दिल्ली ने स्वदेशी तकनीक से सर्विलांस टैक्टिकल बैलून विकसित किया है। इसका उपयोग सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने, शहरी इलाकों में यातायात और भीड़ प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान तथा प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति में संचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए किया जा सकेगा। बुधवार को आईआईटी दिल्ली परिसर में इसका 30 मीटर की ऊंचाई तक सफल लाइव प्रदर्शन किया गया।यह बैलून एयरोस्टेट तकनीक पर आधारित है, जिसमें हवा से हल्की गैस का उपयोग किया जाता है। इस परियोजना को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), आईआईटी दिल्ली, जीबी टेक्सकोट सॉल्यूशन और साइरन एआई ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. मंगला जोशी प्रधान अन्वेषक और प्रो. भूपेंद्र सिंह बुटोला सह-प्रधान अन्वेषक हैं।
प्रो. भूपेंद्र सिंह बुटोला ने बताया कि बैलून को स्वदेशी योजना के तहत तैयार किया गया है। इसका उपयोग निगरानी, संचार और सामरिक अभियानों में किया जा सकेगा। बैलून के निर्माण में प्रयुक्त विशेष नायलॉन फैब्रिक आईआईटी दिल्ली की प्रयोगशाला में विकसित किया गया है। इसका व्यास 5.8 मीटर है। इसी श्रेणी के बैलून अभी अमेरिका से करीब 10 करोड़ रुपये में आयात किए जाते हैं, जबकि आईआईटी दिल्ली और जीबी टेक्सकोट सॉल्यूशन ने इसे लगभग 10 लाख रुपये की लागत में तैयार किया है। हालांकि इसका आकार विदेशी बैलून की तुलना में छोटा है।

