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अमेज़न प्राइम वीडियो विज्ञापन – क्या ये वैध हैं? विश्व की निगाहें ऑस्ट्रेलियाई अदालत पर

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Jul 9, 2026 #accc, #source
Amazon Prime Video ads – are they legal? World watches as Australian court hears matter

अमेज़न प्राइम वीडियो विज्ञापन पर विवाद: क्या ये उपभोक्ता कानून का उल्लंघन हैं?

ऑस्ट्रेलियाई अदालत में अमेज़न के प्राइम वीडियो पर विज्ञापन दिखाने की कानूनीता को लेकर सुनवाई हो रही है, जो न केवल देश में बल्कि विश्वभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद यह मामला संघीय कोर्ट तक पहुंच चुका है, जिससे बड़ी बहस छिड़ गई है।

जब अमेज़न ने अपने प्राइम वीडियो ग्राहकों को विज्ञापन दिखाना शुरू किया, तो कई उपभोक्ताओं ने इसका विरोध किया और उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसियों को शिकायत दर्ज कराई। ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग (ACCC) ने अमेज़न ऑस्ट्रेलिया पर आरोप लगाया है कि उन्होंने प्राइम सदस्यता की शर्तों में बिना उचित पूर्व सूचना के नकारात्मक बदलाव किए, जिससे लगभग 8.5 लाख से अधिक उपभोक्ता प्रभावित हुए।

अमेज़न प्राइम वीडियो ऑस्ट्रेलिया में नेटफ्लिक्स के बाद दूसरी सबसे लोकप्रिय स्ट्रीमिंग सेवा है। ACCC का कहना है कि अमेज़न यूएस इस प्रक्रिया में ‘‘ज्ञानपूर्वक’’ शामिल था। यह मुकदमा ACCC की उन पहलों में से एक है, जिनका उद्देश्य बड़े कॉरपोरेट उपभोक्ताओं के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ता कानून की सुरक्षा को मजबूत करना है। हाल ही में, ACCC ने अमेज़न के खिलाफ बच्चों के असुरक्षित बैकपैकों के लिए भी अलग से मुकदमा दायर किया था।

ACCC उपभोक्ता कानून की सीमाओं को परख रहा है कि वे बड़ी कंपनियों के खिलाफ किस तरह के क़दम उठा सकते हैं—इस मामले में, जिसने व्यापक उपभोक्ता नुकसान पहुंचाया है, हालांकि व्यक्तिगत रूप से छोटे-छोटे।

ACCC के आरोप क्या हैं?

ACCC का आरोप है कि नवम्बर 2023 से अगस्त 2025 के बीच, अमेज़न ऑस्ट्रेलिया के प्राइम अनुबंधों में ऐसे प्रावधान थे जो कंपनी को सेवा और आपूर्ति की शर्तों में बदलाव करने की अनुमति देते थे, बशर्ते उपभोक्ताओं को किसी भी हानिकारक परिवर्तन की सूचना दी जाती। लेकिन ACCC का दावा है कि अमेज़न ने इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया और विज्ञापन ग्राहकों को नहीं बताकर लागू कर दिए।

यह कानूनी लड़ाई उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल सेवा प्रदाताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। अदालत के फैसले से इस क्षेत्र में बड़ी मिसाल कायम हो सकती है।

ACCC की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी जरूरी है, खासकर डिजिटल और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते विस्तार के दौर में। उपभोक्ताओं को यह जानना आवश्यक है कि उनकी सदस्यता सेवाओं में किस प्रकार के बदलाव हो रहे हैं और वे किस हद तक कानूनी सुरक्षा पाएंगे।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)