उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्धनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने युवती की गला दबाकर हत्या करने के मामले में आरोपी धनंजय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट-द्वितीय के न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को बतौर प्रतिकर दिए जाएं।
यदि आरोपी जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी ने बताया कि 19 वर्षीय निशा कुमारी के पिता ओमप्रकाश ने 28 मार्च 2024 को सेक्टर-63 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 27 मार्च को आरोपी धनंजय उनकी बेटी को अपने साथ ले गया था। बाद में सेक्टर-63 स्थित आरोपी के किराए के कमरे में युवती का शव मिला।
पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर अपहरण और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। सुनवाई के दौरान एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने अभियोजन की ओर से ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनसे घटनाक्रम की पूरी कड़ी स्थापित हुई। अदालत ने पाया कि युवती आखिरी बार आरोपी के साथ देखी गई थी। इसके बाद वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ नहीं दिखाई दी। उसका शव आरोपी के कमरे से बरामद हुआ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गला दबाकर हत्या की पुष्टि की और हत्या में प्रयुक्त कपड़े की पट्टी भी बरामद हुई। घटना के तुरंत बाद आरोपी का फरार हो जाना भी अदालत ने उसके खिलाफ महत्वपूर्ण परिस्थिति माना।फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी पहले से विवाहित था, लेकिन उसके मृतका के साथ प्रेम संबंध और शारीरिक संबंध थे। मृतका उस पर विवाह करने का दबाव बना रही थी।
न्यायालय ने माना कि यही हत्या का प्रमुख उद्देश्य (मोटिव) था। आरोपी ने शादी के दबाव से बचने के लिए युवती की हत्या कर दी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब युवती का शव आरोपी के कमरे से बरामद हुआ तो यह बताना आरोपी की जिम्मेदारी थी कि उसकी मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। आरोपी इस संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। न्यायालय ने इसे अभियोजन के पक्ष में एक महत्वपूर्ण परिस्थिति माना।अपने फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी ने विश्वास का दुरुपयोग करते हुए युवती को अपने साथ ले जाकर उसकी निर्मम हत्या की। प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों की श्रृंखला इतनी मजबूत है कि उससे केवल यही निष्कर्ष निकलता है कि हत्या धनंजय ने ही की। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोपी किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं है और उसे आजीवन कारावास से कम सजा देना न्यायोचित नहीं होगा।

