तीन वर्षीय बालिका के यौन शोषण मामले में माता-पिता ने SIT जांच को अदालत में चुनौती दी
गुरुग्राम में एक तीन वर्षीय बालिका से हुई यौन शोषण घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और न्याय प्रणाली की जवाबदेही को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। पीड़ित बालिका के माता-पिता ने विशेष जांच टीम (SIT) की जांच प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए न्यायालय में चुनौती पेश की है।
महाराष्ट्र और हरियाणा पुलिस की संयुक्त SIT ने इस मामले की जांच संज्ञान में लेते हुए शीघ्र कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन अब अभिभावकों का कहना है कि जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की उपेक्षा हुई है और पर्याप्त साक्ष्य संग्रह नहीं किया गया है। सामाजिक न्याय एवं कानून के विशेषज्ञ भी इस मामले को ध्यान से देख रहे हैं।
बालिका के माता-पिता का यह भी आरोप है कि कुछ गवाहों के बयान अधूरे और भ्रमित करने वाले हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कोर्ट में दायर याचिका में SIT की रिपोर्ट पर अंतरिम रोक लगाने और पुनः जांच के आदेश मांगे गए हैं ताकि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।
इस बीच, राज्य सरकार ने कहा है कि बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं होगा और दोषियों को कड़े से कड़ा दंड मिलेगा। सुरक्षा और न्याय की इस संवेदनशील प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है ताकि पीड़ित परिवार और समाज को न्याय का भरोसा बनाए रखा जा सके।
इस मामले की विस्तृत जांच और उचित कानूनी कार्रवाई न केवल पीड़ित परिवार के लिए बल्कि समूची समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण पल साबित होगा, जो बाल सुरक्षा और महिला सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।