सन्नाटा भी एक आवाज़ है: मित्रा समाल की कविताओं में भावनात्मक अंतरंगता
ओडिशा की कवयित्री मित्रा समाल की दूसरी काव्य संग्रह सन्नाटा भी एक आवाज़ है में मौन की वह विशेषता उजागर होती है जो अर्थ को न केवल नया आयाम देती है बल्कि कभी-कभी उसे पूरी तरह समाप्त भी कर सकती है। यह संग्रह पाँच मुख्य विषयों- स्मृतियों का स्पर्श, वास्तविकताएँ, प्रकृति का उत्सव, लालसा, और मौन का बोझ में विभाजित है, जहाँ प्रत्येक भाग की कविताएँ घरेलू परिवेश में गहन अंतरंगता और प्रामाणिक स्वीकारोक्ति प्रस्तुत करती हैं।आत्मावलोकन की प्रक्रिया
पहले भाग स्मृतियों का स्पर्श में संग्रह के कई आवर्ती विषय स्थापित होते हैं, जिनमें विस्थापन का अहसास, बचपन की यादें और पारिवारिक अंतरंगता प्रमुख हैं। इस खंड की कविताओं में अतीत के चित्र वर्तमान को प्रभावित करते हैं, और समय की धुंधली परतों के बीच फटा-फटा सा अनुभव उत्पन्न होता है। ऐसा ही अनुभव “मैं पुराने दीवारों को पसंद करती हूँ” कविता में मिलता है, जहाँ कवयित्री लिखती हैं:“फिर वहां एक दीवार हैसलाहपूर्ण लालसा की भावना भी इस संग्रह में मुखर है। “जाने दो” कविता में वे कहती हैं:
जिस पर फोटो फ्रेम के साये पड़े हैं,
और कीलें हैं जहाँ शायद कभी एक नक्शा टंगा था,
एक नक्शा जो अब संभवतः अप्रासंगिक हो चुका है,
ऐसे स्थान जिनके नाम बदल गए हैं
और सीमाएं जो टल चुकी हैं।”
“मैं शायद इस जगह को कुछ समय के लिए छोड़ दूं,यह तीव्र इच्छा “स्मृतिच्छाया” नामक एक अन्य कविता में भी झलकती है:
पर यह मेरे साथ
सदैव बनी रहेगी।”
“अरे, कितना दर्द होता हैमित्रा समाल की कविताएँ एक बार फिर सिद्ध करती हैं कि मौन सिर्फ अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि वह भावनाओं के जटिल जाल को उजागर करने वाला सार है, जो पाठकों को गहरे आंतरिक अनुभवों से जोड़ता है।
किसी से दूर होने का…”

