2019 में सूडान में हुई क्रांति को अप्रैल 2023 में शुरू हुए सूडानी सशस्त्र बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच युद्ध ने कहीं पीछे धकेल दिया है। हालांकि, 2019 की घटनाएं अधिक ध्यान देने की हकदार हैं क्योंकि ये युद्धोत्तर सूडान के लिए महत्वपूर्ण सबक प्रदान करती हैं।
2019 के प्रदर्शनों में संगीत का केंद्रीय स्थान था। खार्तूम में सैन्य मुख्यालय के बाहर लगे कैम्प में नागरिक शासन की मांग के लिए हफ्तों तक प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगा रहा, जिसे सूडान का सबसे बड़ा कला उत्सव माना गया।
मेरे प्रतिरोध आंदोलनों पर किए गए शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि संगीत केवल प्रदर्शन की साज-सज्जा नहीं है, बल्कि सूडान में यह उस क्रांतिकारी आंदोलन का अभिन्न हिस्सा था जिसने उमर अल-बशीर शासन को उखाड़ फेंका। दशकों तक, संगीत ने सरकार विरोधी भावनाओं को जन्म दिया और उन नेटवर्क व समुदायों को बनाया जिसने 2019 की क्रांति को टिकाए रखा।
मैंने प्रदर्शकारियों और संगीतकारों के साथ साक्षात्कारों के आधार पर हाल ही में एक शोधपत्र में इस अवधारणा का विश्लेषण किया है।
सूडानी संगीत और प्रतिरोध
इतिहास में सूडानी संगीत लोक प्रतिरोध से गहरे जुड़ा रहा है। पहले यह उपनिवेशवादी शासकों के विरुद्ध था और 1956 में स्वतंत्रता के बाद, इसने उपनिवेशोत्तर अत्याचारी शासकों के खिलाफ आवाज़ उठाई। 60 और 70 के दशक के देशभक्ति गान इस भावना को व्यक्त करते थे कि सूडान को लोग बना रहे हैं, न कि सरकार।
जैसे कि एक संगीत प्रेमी ने कहा, ‘सूडानी संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना जगाने और सामाजिक एकता बनाने का माध्यम रहा है।’
यह परंपरा 2019 की क्रांति के दौरान भी जीवित रही, जिससे यह साबित होता है कि संगीत सूडान के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का समर्थन करता है।
इस प्रकार 2019 की क्रांति में संगीत ने सिर्फ प्रदर्शनकारियों को प्रेरित नहीं किया बल्कि उन्हें एकजुट और मजबूत भी किया। यह क्रांति केवल राजनीतिक बदलाव का प्रतीक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी थी।