उद्धव सेना ने लोक सभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
मॉनसून सत्र के बीच उद्धव सेना के छह सांसदों के शिंदे समूह से विलय की अनुमति को लेकर चल रहा विवाद संशय पैदा कर रहा है।
मुंबई: उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्होंने छह सांसदों को महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिव सेना गुट में विलय की मंजूरी दी थी।
इस मामले में उद्धव सेना के वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका प्रस्तुत करते हुए याचिका की त्वरित सूचीबद्धता की मांग की। वकील ने बताया कि संसद में उद्धव ठाकरे-नेतृत्व वाली सेना का कार्य पूर्ण रूप से ठप हो गया है।
मॉनसून सत्र सोमवार को शुरू हुआ जिसमें यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तेजी से विचाराधीन है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल बुधवार या शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई सुनिश्चित करने से इनकार किया है और कहा है, “देखते हैं।”
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को ही छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे समूह में विलय की मंजूरी दी थी। इन छह सांसदों में से नौ में से अधिकांश उद्धव सेना के थे जो 22 जून को शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। अब शिंदे सेना के पास लोक सभा में 13 सांसद हैं और यह गुट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है।
इस बीच, उद्धव सेना ने बागी विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। उद्धव सेना ने लोक सभा अध्यक्ष को सूचित किया था कि बागी सांसद, भले ही वे पार्टी की विधायिका शाखा के दो-तिहाई हों, बिना मूल पार्टी की अनुमति के किसी अन्य पार्टी में विलय नहीं कर सकते।
यह विवाद वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में दलों के सत्ता संघर्ष को दर्शाता है और आगामी दिनों में इस पर न्यायालय की घोषणा awaited होगी।