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क्या चुनाव आयोग अपनी मर्जी से काम कर सकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR के लिए शिक्षकों की तैनाती पर लगाई सवाल

Byadmin

Jul 24, 2026 #sir, #source
‘Can EC do whatever it likes?’ asks Delhi HC in plea against deployment of teachers for SIR

दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से शिक्षकों की तैनाती पर सवाल उठाए

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान आयोग से कड़ी पूछताछ की।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायाधीश तेजस करिया की पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा, “क्या आप अनुच्छेद 324 का सहारा लेकर अपनी मनमर्जी कर सकते हैं?” यह प्रश्न उस याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया गया, जिसमें शिक्षकों को इस कार्य के लिए अनिवार्य करने के पक्ष में सवाल उठाए गए हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों का पर्यवेक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण करने का अधिकार प्राप्त है। आयोग द्वारा इस विशेष गहन संशोधन के तहत मतदाता सूची को घर-घर जाकर जांचने और पुराने मतदाताओं के डेटा की पुष्टि करने का कार्य जारी है।

याचिका राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल ने दाखिल की है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग ने कुछ सरकारी स्कूलों के सभी नियमित शिक्षकों को बूथ स्तर के अधिकारी के रूप में तैनात कर दिया है। इससे उन स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले विषयों के प्रति अज्ञानता रखने वाले अतिथि शिक्षकों या असंबंधित शिक्षकों को कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं।

अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि यह कार्य केवल अवकाश या गैर-शिक्षण समय तक सीमित नहीं रखा गया है, जिससे शिक्षकों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा यह कहा गया कि यह व्यवहार असमान एवं भेदभावपूर्ण है क्योंकि केवल सरकारी, निगम एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को इस काम के लिए लगाया गया है।

इस याचिका को सुनवाई के दौरान बार एंड बेंच द्वारा रिपोर्ट किया गया, जिसने इस मामले को न्यायिक नजरिए से गंभीरता से लिया गया है।

चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर न्यायालय जल्द ही कोई निर्णय दे सकता है, जिससे मतदाता सूची संशोधन के तरीके एवं शिक्षकों की तैनाती के नियमों में स्पष्टता आएगी।

यह मामला शिक्षा और चुनाव प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को दर्शाता है, जिसके लिए न्यायालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)