गणेशोत्सव के दौरान नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) शहर में 170 कृत्रिम विसर्जन तालाब स्थापित करेगा। नगर निगम ने नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल तरीके से गणेशोत्सव मनाने और प्राकृतिक जलस्रोतों में मूर्तियों का विसर्जन न करने की अपील की है।
नागरिकों से कहा गया है कि वे गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन अपने नजदीकी कृत्रिम तालाबों में ही करें। यह व्यवस्था अदालत के निर्देशों और महाराष्ट्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार की जा रही है। नगर प्रशासन के मुताबिक, छह फीट ऊंची गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करना जरूरी होगा।
मेयर सुजाता पाटिल और नगर आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे ने लोगों से प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के बजाय प्राकृतिक शादू मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को अपनाने की अपील की है। इसके साथ ही नागरिकों से प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव मनाने का आग्रह किया गया है।
NMMC के आठ प्रशासनिक प्रभागों में कुल 170 कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार किए जा रहे हैं। इनमें बेलापुर में 22, नेरुल में 29, वाशी में 16, तुर्भे में 21, कोपरखैरने में 16, घनसोली में 16, ऐरोली में 25 और दीघा में 25 तालाब बनाए जाएंगे। इन सभी को मिलाकर संख्या 170 होगी।
NMMC ने गणेश मंडलों और नागरिकों से सजावट के दौरान प्लास्टिक और थर्मोकोल का इस्तेमाल पूरी तरह से न करने की अपील की है। इसके स्थान पर कपड़े और कागज जैसी दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामग्री का उपयोग करने को कहा गया है। आयोजकों को संगीत की आवाज स्वीकार्य सीमा में रखने और लेजर लाइट का इस्तेमाल न करने की सलाह भी दी गई है।
NMMC क्षेत्र में गणेश प्रतिमाओं के पारंपरिक विसर्जन के लिए 22 स्थान हैं। पिछले कुछ वर्षों में भीड़ को अलग-अलग जगहों पर बांटने और एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था की गई है। इससे प्राकृतिक जलस्रोतों में होने वाले प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिली है।
नागरिक प्रशासन के अनुसार, पारंपरिक और कृत्रिम दोनों विसर्जन स्थलों पर स्वयंसेवक, लाइफगार्ड और अग्निशमन कर्मियों की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा बिजली, CCTV निगरानी, स्वास्थ्य सुविधाएं, पीने का पानी, स्वच्छता तथा निर्माल्य संग्रह और परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। राफ्ट और फोर्कलिफ्ट जैसे उपकरण भी तैनात किए जाएंगे।
NMMC के मुताबिक, गणेश मंडल बनाने की अनुमति सिंगल-विंडो ऑनलाइन ई-सेवा के जरिए दी जा रही है। मंडप निर्माण की अनुमति के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

