महाराष्ट्र में बारिश की कमी के बीच राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। सरकार के इस फैसले के दायरे में राज्य के करीब 74 फीसदी तालुके आते हैं। बीड और धाराशिव समेत कई इलाकों में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसलों, पशुओं और पीने के पानी को लेकर परेशानी बढ़ी है।
सूखे से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदमों का ऐलान किया है। इसमें जमीन के राजस्व में छूट, फसल लोन के पुनर्गठन और खेती से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं। किसानों के कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी जाएगी।
जिन इलाकों में पानी की जरूरत होगी, वहां पीने के पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश दिए गए हैं। खेती पर निर्भर किसानों और मजदूरों को अनाज देने, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने और पानी बचाने के काम को भी बढ़ाया जाएगा।
सूखा प्रभावित इलाकों में छात्रों को परीक्षा फीस में राहत देने और रोजगार गारंटी योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा काम शुरू करने की भी बात कही गई है। सरकार की ओर से कुल 12 राहत उपायों की घोषणा की गई है।
फसल नुकसान की जांच के आदेश
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। फसलों की स्थिति की तस्वीरें और GPS से जुड़ा डेटा भी जुटाया जाएगा, ताकि जमीन पर हुए नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
सरकार के मुताबिक, किसानों को मिलने वाली वास्तविक आर्थिक मदद का फैसला जमीन पर होने वाले आकलन के बाद किया जाएगा।
बीड और धाराशिव में हालात गंभीर
बीड और धाराशिव जैसे जिलों में जुलाई के बाद से बारिश की कमी का असर खेती और रोजमर्रा की पानी की जरूरतों पर पड़ा है। राज्य में कुल बारिश सामान्य से 18.8 फीसदी कम दर्ज की गई है। वहीं, कुछ जिलों में बारिश की कमी 40 से 50 फीसदी तक रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में सूखे से प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की थी। सरकार ने फसल नुकसान का सर्वे और जमीन पर स्थिति की जांच कराने की बात कही है।
किसानों को राहत का इंतजार
सूखा घोषित होने के बाद अब किसानों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक और दूसरी राहत पर है। अधिकारियों के जमीनी आकलन के आधार पर प्रभावित किसानों को आगे सहायता देने की प्रक्रिया तय की जाएगी।

