महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर चल रही SIR प्रक्रिया के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने SIR के नोटिस चरण में इस्तेमाल हो रहे ECINet सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव करने और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को ज्यादा अधिकार देने की मांग की है।
महाराष्ट्र CEO की मांग उन चिंताओं से भी जुड़ी है, जिन्हें चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू पहले उठा चुके हैं। दोनों ने मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों के काम में सॉफ्टवेयर के जरिए होने वाले केंद्रीय नियंत्रण पर सवाल उठाए थे।
क्या है ‘लॉजिकल डिस्क्रेंसी’?
महाराष्ट्र में फिलहाल SIR का नोटिस चरण चल रहा है। इस दौरान ECINet सॉफ्टवेयर कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेंसी’ यानी रिकॉर्ड से जुड़ा बेमेल दिखा रहा है।
ऐसा तब हो सकता है, जब सिस्टम किसी मतदाता की जानकारी को पिछली मतदाता सूची में दर्ज उसके माता-पिता या दादा-दादी के रिकॉर्ड से मिलाने की कोशिश करता है, लेकिन नाम या उम्र जैसी जानकारी मैच नहीं करती।
हालांकि, इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि मतदाता फर्जी है। यह केवल रिकॉर्ड में जानकारी के मेल न खाने का संकेत है।
महाराष्ट्र CEO ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को सुनवाई के बाद अंतिम फैसला लेने की ज्यादा स्वतंत्रता दी जाए। साथ ही, अगर ERO को दिए गए दस्तावेज पर्याप्त लगते हैं, तो मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने से छूट देने का अधिकार भी अधिकारियों को मिलना चाहिए।
सॉफ्टवेयर को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
कानून के तहत मतदाता सूची तैयार करने, आपत्तियों पर सुनवाई करने और नाम जोड़ने या हटाने की जिम्मेदारी ERO की होती है। ये अधिकारी आमतौर पर SDM स्तर के होते हैं।
महाराष्ट्र CEO का कहना है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर व्यवस्था काफी हद तक केंद्रीकृत है और इसका नियंत्रण DG-IT के स्तर पर है। ऐसे में स्थानीय अधिकारियों के पास अपने कानूनी अधिकारों के मुताबिक फैसला लेने की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी 14 अगस्त के अपने नोट में इसी तरह की चिंता जताई थी। उनका कहना था कि कानून के अनुसार ERO, DEO और CEO की जिम्मेदारियां तय हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर के जरिए केंद्रीकृत नियंत्रण उनके काम में दखल डाल सकता है।
चुनाव आयोग ने क्या फैसला लिया?
महाराष्ट्र से मिले सुझावों और आयोग के भीतर उठी चिंताओं के बाद 26 सितंबर को पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक हुई। इसके बाद आयोग ने महाराष्ट्र की कुछ मांगों को स्वीकार किया।
अब ERO को यह अधिकार दिया गया है कि वे लॉजिकल डिस्क्रेंसी वाले मामलों में जरूरत के मुताबिक मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट दे सकते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि राज्यों के CEO से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई बदलाव किए जा चुके हैं। आगे भी फील्ड अधिकारियों को किसी तरह की अतिरिक्त सुविधा या लचीलेपन की जरूरत महसूस होती है, तो उसमें बदलाव किया जा सकता है।
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटे
31 अगस्त को जारी महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या में 21.1 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
महाराष्ट्र के CEO एस. चोकलिंगम के मुताबिक, SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की बताई गई है जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अपना स्थान बदल चुके हैं।
राज्य की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी की जाएगी।

