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UP- गरीबों की मसीहा बने राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन, एक लाख मरीजों का मुफ्त में कर चुके इलाज

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग़रीबो के मसीहा बने राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन ने अब तक एक लाख से भी ज्यादा मरीज़ों को मुफ्त में इलाज कर रहे है। चर्चा में आए राजेश सिंह दयाल द्वारा लोगो को बेहतर स्वास्थ सुविधाए हो,पैसे के अभाव में न हो किसी की मौत इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए लगातार तत्पर दिखाई देने वाले राजेश सिंह दयाल को लेकर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में काफी चर्चाएं है हो भी क्यों न राजेश सिंह दयाल द्वारा क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा स्वास्थ शिविर लगाकर जिनमे मरीजों को मुफ्त जांच, मुफ्त इलाज,मुफ्त दवा मुहैया कराई जाती है।

जिसका फायदा एक लाख से ज्यादा क्षेत्र के मरीजों द्वारा उठाया गया है।इसी प्रकार का शिविर का आयोजन जिले के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के लार विकास खंड के ग्राम पंचायत सजाव में आयोजित हुआ जिनमे हजारों मरीजों को फायदा हुआ।
मीडिया से बात करते हुए राजेश सिंह दयाल में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा क्षेत्र विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है वर्तमान राजनीति जाति पर आधारित हो चुकी है, वर्तमान में डॉक्टर मरीज का इलाज नहीं करते सिर्फ रेफर करते हैं जिसके कारण गरीब जनता भटकती है परिणाम स्वरूप उनको अपनी जान गवानी पड़ती है।आगे उन्होंने बताया की मेरे बेटे की मौत के बाद मैं सेवा भाव से आया हु राजनीति नहीं करने। इन्ही के परिणाम स्वरूप लोगो मुफ्त इलाज मुहैया करा जा रहा है।आगे उन्होंने बताया की राजेश सिर्फ एक नही बल्कि एक समूह का नाम है जिसमे 45 से 50 लोग काम करते है।
क्या आगामी लोक सभा में चुनाव लडने के सवाल पर बताया की मैं टिकट मांगने कही नही जाऊंगा। चाहे मुझे मिले या न मिले,सेवा के लिए आया हु सेवा मरते दम तक करता रहूँगा

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}