• Tue. Sep 22nd, 2026

India Core News | Read Latest Trending News..

आपका इंडिया आपकी न्यूज़

ग्रेटर नोएडा: लंबित परियोजनाओं में फंसे हुए करीब आठ हजार खरीदारों को उनके आशियाना मिलने की उम्मीद बनी

ByAnkshree

Dec 13, 2025

ग्रेटर नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी में जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड की लंबित परियोजनाओं में फंसे हुए करीब आठ हजार खरीदारों को उनके आशियाना मिलने की उम्मीद बनी है। इसके लिए यमुना प्राधिकरण समाधान प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। आवासीय क्षेत्र के लिए इस प्रस्ताव अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में बनी उच्चस्तरीय समिति की बैठक में सहमति बनी है।
पिछले दिनों फ्लैट खरीदारों की समस्या को लेकर अपर मुख्य सचिव ने बैठक की। इसमें ऑडिटर करी एंड ब्राउन की रिपोर्ट का प्रजेंटेशन भी अधिकारियों को दिया गया।

अधिकारियों के मुताबिक जेपी स्पोर्ट्स सिटी मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर एक समिति गठित हुई थी। इसकी पहली बैठक यह थी। बैठक में करी एंड ब्राउन ने जेपी एसोसिएट्स की रुकी परियोजनाओं को पूरी करने के लिए संभावित समाधान भी बताए।

बैठक में अधिकारियों को परियोजना की वर्तमान स्थिति, खाली व बेचे गए संपत्तियों का विवरण, बैंकों की देयता की जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की देयता है। बैठक में 19 मई 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन पर भी चर्चा रही। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि प्राधिकरण चाहे तो परियोजना को पूरी करने के लिए अपना प्लान बना सकता है, लेकिन कोर्ट की अनुमति के बाद ही इस पर काम किया जा सकेगा। अब यीडा को परियोजना की आवासीय क्षेत्र का प्लान बनाने के निर्देश समिति ने दिए हैं। यह प्लान हाईकोर्ट के आदेश को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इस पर काम शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्राधिकरण ने प्लान बनाने की तैयारी कर ली है।

भूखंड का आवंटन हो चुका निरस्त
2009-10 में जेपी एसोसिएट्स की सहायक कंपनी जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स को स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने के लिए विशेष विकास क्षेत्र (एसडीजेड) योजना में जमीन आवंटित हुई। इस 1000 हेक्टेयर भूमि का आवंटन यीडा निरस्त कर कब्जा वापस ले चुका है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में यमुना प्राधिकरण के बकाया भुगतान नहीं करने के कारण जमीन आवंटन रद्द करने के निर्णय को सही माना था।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )