JEE एडवांस्ड में ‘एडैप्टिव’ पद्धति: IITs का कोचिंग संस्कृति पर नियंत्रण का नया प्रयास
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) ने JEE एडवांस्ड परीक्षा में एक नई ‘एडैप्टिव’ सिस्टम को पायलट के तौर पर लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य भारत में व्याप्त कोचिंग संस्कृति को सीमित करते हुए परीक्षाओं को और अधिक निष्पक्ष बनाना है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कोचिंग संस्थानों का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ रहा है, जो परीक्षा की तैयारी को महंगा और कुछ हद तक पक्षपातपूर्ण बना देता है। IITs इस नई प्रणाली के जरिए परीक्षार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना चाहते हैं।
‘एडैप्टिव’ परीक्षा प्रणाली क्या है? यह एक ऐसा मॉडल है जिसमें परीक्षा का स्तर परीक्षार्थी के उत्तरों के आधार पर बदलता रहता है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्र की वास्तविक क्षमता का मूल्यांकन करना है न कि केवल पूनःप्रशिक्षित ज्ञान का।
पायलट टेस्ट के दौरान, चयनित छात्रों को इस नई प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न प्रश्न दिए जाएंगे, जो उनकी समझ और कौशल के स्तर के अनुरूप होंगे। IIT के अधिकारियों का कहना है कि इससे छात्रों को उनकी कमजोर और मजबूत क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
कोचिंग उद्योग पर प्रभाव के संदर्भ में, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एडैप्टिव परीक्षा प्रणाली पारंपरिक कोचिंग तरीकों को चुनौती दे सकती है। इससे छात्रों को रटंत अभ्यास छोड़कर अवधारणात्मक समझ विकसित करने पर जोर देना पड़ेगा।
इस पहल के पीछे IITs की दीर्घकालिक योजना भारत में शिक्षा के गुणात्मक सुधार का हिस्सा भी है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच सभी के लिए समान और अवसरों से भरपूर हो।
निष्कर्षतः, IITs द्वारा JEE एडवांस्ड में एडैप्टिव पद्धति का पायलट परीक्षण शिक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं। हालांकि, इस प्रणाली की व्यापक सफलता उसके कार्यान्वयन और परिणामों पर निर्भर करेगी।