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पीएम के रोड शो से पहले बनारस के घाट पर 1000 ड्रोन कैमरों का दृश्य का दिखा नजारा,13 मई को मोदी करेगे 5 किमी लंबा रोड शो

Report By : Rishabh Singh, ICN Network

वाराणसी में PM मोदी के रोड शो से पहले ड्रोन शो हुआ। दशाश्वमेध घाट के गंगा पार रेती से एक साथ 1000 ड्रोन उड़े। कमल का फूल, डमरू, विश्वनाथ दरबार, गंगा विलास क्रूज और नमो घाट का नजारा दिखा। इस शो को देखने के लिए 88 घाटों पर करीब ढाई लाख लोग पहुंचे। ये शो लगातार 4 दिनों तक होगा।

गुरुवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के बाद शाम 7 बजकर 45 मिनट पर ड्रोन शो शुरू हुआ। 15 मिनट के इस शो में PM मोदी का लोगों से कनेक्ट दिखाया गया। 1000 ड्रोन से गंगा के ऊपर PM मोदी के 10 साल में किए गए विकास को दिखाया। फिर एक बार मोदी सरकार और ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे की आकृति भी बनाई गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 मई को वाराणसी में 5 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। रोड शो का रूट तय हो गया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बाहर महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। इसके बाद अस्सी घाट के रास्ते से सोनारपुरा, जंगमबाड़ी, गोदौलिया, बांसफाटक होते हुए बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर से मंदिर तक पहुंचेंगे। मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। 14 मई को वाराणसी संसदीय सीट के लिए तीसरी बार नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}