लेकिन जांच में सामने आया कि: पास UTS ऐप के बजाय गूगल क्रोम में खुला था QR कोड मौजूद नहीं था पास का सीरियल नंबर भी संदिग्ध लग रहा था जब अधिकारी ने सेंट्रल रेलवे हेल्पलाइन से पास का नंबर सत्यापित कराया तो पता चला कि इसकी वैधता तो फरवरी 2025 में ही खत्म हो चुकी है। साथ ही, पास महिला के नाम पर नहीं, बल्कि ओंकार शर्मा नाम के व्यक्ति पर पंजीकृत था — जो महिला का पति निकला। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो बड़ा खुलासा सामने आया। महिला के पति ओमकार, जो पेशे से इंजीनियर है, ने स्वीकार किया कि उसने कोडिंग और AI टूल्स — जैसे ChatGPT — की मदद से नकली UTS पास तैयार किया था।
जब पुलिस ने महिला का फोन खंगाला तो उसमें 10 और फर्जी पास मिले, जिन्हें ओमकार ने अलग-अलग लोगों को भेजा था। अच्छी नौकरी, फिर भी महीनों से चल रहा था फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, महिला गुड़िया एक्सिस बैंक में सेल्स मैनेजर है और उसका पति तकनीकी पेशेवर। इसके बावजूद दोनों महीनों से फर्जी डिजिटल पास दिखाकर AC लोकल में सफर कर रहे थे। कल्याण रेलवे पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

