• Wed. Jul 15th, 2026

इटावा जनपद के जसवंत नगर विधानसभा क्षेत्र में चौपाल में पहुंचे अखिलेश यादव ,भाजपा पर जमकर हमलावर हुए

Report By : Rishabh Singh,ICN Network

अखिलेश यादव ने मीडिया के सवालों पर जवाब देते हुए कहा,बीजेपी के लगातार अबकी बार 400 पर के दावे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मैंने आपसे पहले चरण के बाद जो भाषा बदली है और भारतीय जनता पार्टी का चाहे वह नेतृत्व हो और चाहे छोटा कार्यकर्ता हो उनकी किस तरीके से भाषा बदली है मुझे उम्मीद है कि जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है चुनाव आयोग उन पर शक्ति करेगी चुनाव आयोग कोई न कोई कार्रवाई ऐसी लीडर्स पर करेगा जो चुनाव का ध्यान किसी और तरफ ले जाना चाहते हैं। उनके भाषणों पर हार का रुझान दिखाई दे रहा है अगर हार ना रहे होते तो यह भाषा होती और जिन्हें 400 पर का नारा देना था वह आज क्या कह रहे हैं जिन्होंने 400 पर का नारा दिया उनकी भाषा क्या है तो इसका मतलब यह है कि कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी के अंदर घबराहट है किसान नौजवान व्यापारी और आम जनता इनके खिलाफ मतदान करने जा रही है।
मां की बात नहीं होगी अब संविधान की बात होगी संविधान बचेगा तो हमारे आपके अधिकार बचेंगे संविधान बचेगा तो हमें आपका मान सम्मान बढ़ेगा यही संविधान है जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने दिया वह हमें संजीवनी देता है यह भारतीय जनता पार्टी के लोग संविधान को खत्म करना चाहते हैं संविधान को बदलना चाहते हैं जो लोग संविधान बदलना चाहते हैं उन्हें जनता इस बार बदल देगी,

पहले चरण जैसा ही चुनाव दूसरे चरण का होगा जैसे पहले चरण में लोगों ने मतदान किया है भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ दूसरे चरण में वैसा ही मतदान होने जा रहा है

मंत्री रघुराज प्रताप के आरक्षण वाले बयान पर बोले अखिलेश मेरी जानकारी में नहीं है।

सच्चाई तो यह है की अर्थव्यवस्था का पूरा सत्यानाश अगर किसी ने किया तो भारतीय जनता पार्टी ने अर्थव्यवस्था में केवल इतना ही हम समझते हैं कि जिस समय किस की आय दोगुनी होगी रोजगार भी बढ़ेंगे नौकरी भी बढ़ेगी हमारी अर्थव्यवस्था और तेजी से रफ्तार से बढ़ेगी और जो सपना दिखाया था मेक इन इंडिया का उसे मेक इन इंडिया नहीं हुआ कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी और दिशा में हमारी अर्थव्यवस्था को ले गए जब तक यहां कारखाने उद्योग नहीं लगेंगे और किस कुशल नहीं होगा तब तक हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
अमेरिकी शेयर बाजार आज: एएसएमएल द्वारा एआई भावना बढ़ाने, मुद्रास्फीति कम होने से नैस्डैक बढ़त में है
ओमान तट पर जहाज हमले में लापता भारतीय नाविक की मौत: परिवार ने पुष्टि की

Don't Miss

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}