बीटा-2 क्षेत्र के अंसल सोसाइटी स्थित एक प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो बार बेचने और असली मालिक को कब्जे से बेदखल करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट के आदेश पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने अंसल हाउसिंग के निदेशक, प्रबंधक, कर्मचारी समेत सात आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पीड़ित मंगाराम चंदवानी ने शिकायत में बताया कि उन्होंने ओमेगा पी-8 ग्रेटर नोएडा स्थित अंसल सोसाइटी में एक प्लॉट शिव कुमार रैना नामक व्यक्ति से 37 लाख 51 हजार रुपये में 17 अक्तूबर 2023 को खरीदा था। इस सौदे को लेकर विक्रेता के साथ रजिस्टर्ड इकरारनामा भी कराया गया था।
शिकायतकर्ता ने बाद में इसी प्लॉट के संबंध में अपने पुत्र ध्रुव कुमार चंदवानी के पक्ष में एक रजिस्टर्ड वसीयत भी 5 सितंबर 2024 को करवाई। आरोप है कि प्लॉट का मौके पर कब्जा भी शिकायतकर्ता को सौंप दिया गया था और नाम हस्तांतरण की प्रक्रिया चल ही रही थी। इसी दौरान 25 जनवरी 2025 को बीमारी के चलते विक्रेता शिव कुमार रैना की मृत्यु हो गई।जब उन्होंने प्लॉट को अपने नाम कराने के लिए अंसल गोल्फ लिंक कार्यालय को नोटिस भेजा तो कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद पता चला कि अंसल हाउसिंग लिमिटेड के निदेशक कुशाग्र अंसल और प्रबंधक करुण अंसल ने अपने कर्मचारी रविन्द्र कुमार पाल के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और प्लॉट को जम्मू निवासी रतन लाल रैना और गुरुग्राम निवासी श्यामा राव के नाम फर्जी तरीके से बेच दिया। आरोप है कि 17 नवंबर 2025 को इसकी फर्जी रजिस्ट्री भी करा दी गई। रतन लाल रैना और श्यामा राव की कथित फर्जी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर दिल्ली निवासी हीरालाल दासी ने इस प्लॉट को दोबारा प्रॉपर्टी डीलर दिनेश चन्द शर्मा को 22 नवंबर 2025 को बेच दिया, जिसकी रजिस्ट्री भी करा ली गई। कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

