अमेरिका ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर भारत समेत 60 देशों से आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत सहित 59 देशों पर आरोप लगाया है कि वे जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के व्यापार को रोकने में विफल रहे हैं, जिसके चलते अमेरिका ने इन देशों से आयातित वस्तुओं पर 10% से 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने मंगलवार को यह प्रस्ताव दिया जिसमें कहा गया है कि ये देश आपराधिक श्रम नीतियों के कारण अमेरिकी व्यापार को बाधित कर रहे हैं। ऐसा गैरकानूनी व्यापार व्यवहार ट्रेड अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत गैरकानूनी माना जाता है।
प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने कुछ न कुछ कदम उठाए हैं, उनके आयात पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा जबकि अन्य देशों पर 12.5% की दर से अतिरिक्त शुल्क लागू होगा। भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जिन पर 12.5% टैरिफ लगने का प्रस्ताव है।
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि “हमारे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने में असफलता अस्वीकार्य है।” उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई न करने से अमेरिकी मजदूरों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है।
यह प्रस्ताव इस जांच के बाद आया है जो 12 मार्च को शुरू की गई थी, जिसमें 60 अर्थव्यवस्थाओं के खानपान में जबरन श्रम उत्पादित सामान के प्रतिबंध के अनुपालन पर संदेह जताया गया था। जाँच में पाया गया कि भारत, बांग्लादेश, चीन, इज़राइल, जापान जैसे 54 देश इस प्रतिबंध को प्रभावी रूप से लागू करने में विफल रहे हैं।
यह कदम अमेरिकी व्यापार नीति में निष्पक्षता सुनिश्चित करने तथा जबरन श्रम के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इस विवाद से दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा और व्यावसायिक नैतिकता की प्रवृत्ति को बढ़ावा देंगी। वहीं, भारत समेत प्रभावित देशों ने इस आरोप का खंडन करते हुए अपने कामकाज को जिम्मेदार और नैतिक बताते हुए इस प्रस्ताव की समीक्षा कर उचित प्रतिक्रिया व्यक्त करने की बात कही है।